छत्तीसगढ़

’’धान खरीदी केंद्र बास्तानार में एसडीएम की पहल, किसानों ने कराया रकबा समर्पण, बस्तर में जोरों पर धान खरीदी, केंद्रों पर दिख रहा प्रशासनिक सक्रियता का असर’’….

जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । बस्तर जिले के जनपद पंचायत बास्तानार लौहण्डीगुड़ा क्षेत्र में इन दिनों धान खरीदी कार्य पूरे उत्साह और गति के साथ संचालित हो रहा है । सहकारी धान खरीदी केंद्रों में किसान निर्धारित टोकन के माध्यम से व्यवस्थित ढंग से धान विक्रय कर रहे हैं, वहीं संबंधित विभागों की सक्रियता से व्यवस्था सुचारू बनी हुई है ।

धान खरीदी की निगरानी के क्रम में एसडीएम शंकरलाल सिन्हा के नेतृत्व में जनपद पंचायत बास्तानार के विभिन्न गांवों में रकबा समर्पण की प्रक्रिया कराई गई, जिसमें किसानों ने कम उत्पादन के कारण स्वेच्छा से लगभग 21 हेक्टेयर रकबा समर्पण किया। प्रशासन का कहना है कि जिन किसानों की फसल अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पाई, उनके लिए रकबा समर्पण की यह प्रक्रिया पारदर्शिता और सुविधा के उद्देश्य से अपनाई जा रही है ।

गौरतलब है कि बस्तर जिले में खरीफ मौसम की प्रमुख फसल धान है, जो यहां के किसानों की आजीविका का मुख्य साधन मानी जाती है । इसके साथ ही मक्का, कोदो, कुटकी, रागी, उड़द सहित अन्य फसलों की भी खेती की जाती है । सरकार द्वारा समय पर धान खरीदी शुरू किए जाने से किसानों को उपज का उचित मूल्य मिल रहा है, जिससे उनमें संतोष देखा जा रहा है ।

लौहण्डीगुड़ा लेम्पस अंतर्गत ग्राम अलनार में अब तक लगभग 15 हजार क्विंटल धान की खरीदी की जा चुकी है, हालांकि राइस मिलों की प्रक्रिया धीमी होने के कारण धान उठाव में विलंब हो रहा है, जिससे लेम्पस प्रभारियों और सहकारी विभाग के कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है ।

वहीं लेम्पस अलनार के प्रभारी महेश कुमार सेठिया के द्वारा रकबा समर्पण की प्रक्रिया में किसानों को सहयोग प्रदान किया जा रहा है ।
लेम्पस लौहण्डीगुड़ा में कुल 22 हजार क्विंटल धान खरीदी हो चुकी है तथा प्रतिदिन लगभग 1300 क्विंटल के टोकन काटे जा रहे हैं । अब तक करीब 35 किसानों द्वारा लगभग 10 हेक्टेयर रकबा समर्पण किया जा चुका है ।

धान खरीदी की रफ्तार तेज होने से किसान सरकार के प्रति संतोष जता रहे हैं । हालांकि कुछ केंद्रों पर तौल माप में पारदर्शिता को लेकर किसानों ने सतर्कता बरतने की मांग भी की है । किसानों का कहना है कि यदि व्यवस्था इसी प्रकार सुचारू रही, तो वे अपनी उपज उचित समर्थन मूल्य पर बेचकर अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकेंगे ।

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