जिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ, दंतेवाड़ा का एक दिवसीय हड़ताल, स्थानीय समस्याओं को लेकर प्रशासन को सौंपा ज्ञापन….


दंतेवाड़ा(प्रभात क्रांति)। जिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ, दंतेवाड़ा द्वारा आज एक दिवसीय हड़ताल करते हुए अपनी विभिन्न मांगों एवं समस्याओं को लेकर जिला प्रशासन के माध्यम से राज्य शासन को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े के नाम कलेक्टर दंतेवाड़ा को संबोधित करते हुए आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन में आ रही प्रमुख समस्याओं से अवगत कराया गया।
संघ ने बताया कि आंगनवाड़ी केंद्रों के सुचारू संचालन में कई व्यावहारिक एवं स्थानीय स्तर की दिक्कतें सामने आ रही हैं, जिनके कारण पोषण कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
प्रमुख समस्याएं इस प्रकार हैं:
रेडी टू ईट (RTE) सामग्री का वितरण माह के अंतिम सप्ताह में किया जाता है, जबकि पोषण ट्रैकर में 10 से 15 तारीख के बीच प्रविष्टि करने का दबाव रहता है, जिससे हितग्राहियों में भ्रम की स्थिति बनती है।
जिले के कई आंगनवाड़ी भवन जर्जर हालत में हैं, जहां बिजली, पानी एवं पंखे जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। कई केंद्र किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों से कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को मिलने वाला ग्रीष्मकालीन अवकाश बंद कर दिया गया है, जिसे पुनः लागू करने की मांग की गई है। 
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से अन्य विभागों के कार्य जैसे सर्वे, जनगणना एवं ऑनलाइन एंट्री कराई जाती है, लेकिन इसके लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं दिया जाता।
केंद्रों में खाना बनाने के लिए पर्याप्त बर्तन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे संचालन में परेशानी होती है।
पोषण ट्रैकर में एंट्री के लिए परियोजना कार्यालय बुलाया जाता है, लेकिन परिवहन भत्ता नहीं दिया जाता।
सुपोषण अभियान के चलते ईंधन की खपत बढ़ी है, लेकिन ईंधन खर्च की राशि पर्याप्त नहीं मिल रही है।
सहायिकाओं के सेवानिवृत्ति या मृत्यु के बाद मिलने वाली एकमुश्त राशि कई जगह समय पर नहीं मिल रही है।
गीदम, दंतेवाड़ा, किरंदुल एवं कटेकल्याण परियोजनाओं में परियोजना अधिकारी के पद रिक्त हैं, जिससे कार्य प्रभावित हो रहा है।
लगभग 30 प्रतिशत केंद्रों में वजन मशीन नहीं होने से बच्चों का नियमित वृद्धि मापन नहीं हो पा रहा है।
संघ ने प्रशासन से मांग की है कि इन समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन सुचारू रूप से हो सके और बच्चों एवं महिलाओं के पोषण स्तर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का जल्द निराकरण नहीं किया गया, तो आगे उग्र आंदोलन किया जाएगा।




