छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में शासकीय कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल जारी, मोदी की गारंटी पर सवाल, 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन और शासकीय कार्य सूना ’’….देखें वीडियों

जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद से ही शासकीय कर्मचारियों द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर समय-समय पर आंदोलन और हड़ताल की जाती रही है। वर्तमान में एक बार फिर शासकीय कर्मचारी फेडरेशन, द्वितीय एवं तृतीय वर्ग कर्मचारी, पंचायत कर्मचारी, संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर तीन दिवसीय हड़ताल पर चले गए हैं।
प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत बस्तर जिला इकाई के कर्मचारियों ने जगदलपुर स्थित मंडी प्रांगण में तीन दिवसीय धरना प्रदर्शन का आयोजन किया, जिसमें विभिन्न विभागों के हजारों कर्मचारी शामिल हुए। धरना स्थल पर पूरा परिसर कर्मचारियों से खचाखच भरा नजर आया।

मोदी की गारंटी पर उठे सवाल

कर्मचारियों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ”मोदी की गारंटी“ के नाम पर सत्ता में आई, लेकिन सरकार के गठन के 100 दिन से अधिक बीत जाने के बावजूद घोषणा पत्र में किए गए वादे अब तक पूरे नहीं किए गए। इससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी व्याप्त है।

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि इससे पहले कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी मांगें पूरी नहीं होने पर सत्ता परिवर्तन हुआ था, ऐसे में यह सरकार के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

कर्मचारियों की प्रमुख 11 मांगें –

  • केंद्र सरकार के समान महंगाई भत्ता (डीए) देय तिथि से लागू किया जाए,
  • डीए एरियर्स को जीपीएफ खाते में समायोजित किया जाए,
  • चार स्तरीय समयमान वेतनमान लागू किया जाए,
  • विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियां दूर कर पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए,
  • प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना कर पूर्ण सेवा लाभ दिया जाए और पंचायत सचिवों का शासकीयकरण किया जाए,
  •  सहायक शिक्षकों व सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान मिले,
  • नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित वेतन व समयबद्ध पदोन्नति दी जाए,
  • अनुकंपा नियुक्ति में 10 प्रतिशत सीलिंग में शिथिलीकरण किया जाए,
  • प्रदेश में कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू हो,
  • अर्जित अवकाश नगदीकरण 300 दिवस किया जाए,
  • दैनिक, संविदा व अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण की ठोस नीति बनाई जाए
  • सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जाए।

हड़ताल के चलते जिले भर के सरकारी कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। कोई भी कर्मचारी अपने कार्यालय में उपस्थित नहीं दिखे, जिससे प्रशासनिक एवं जनहित से जुड़े कई कार्य प्रभावित हुए। कर्मचारियों का दावा है कि हड़ताल के कारण सरकार को करोड़ों रुपये का आर्थिक नुकसान हो रहा है।

अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तीन दिवसीय हड़ताल के बाद भी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। अंतिम दिन धरना स्थल से रैली निकालकर राज्यपाल के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा।

अब देखना यह होगा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार शासकीय कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए उन्हें पूरा करती है या एक बार फिर केवल आश्वासन देकर आंदोलन को टालने का प्रयास करती है।

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