छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहे अनुदेशकों ने एक बार फिर सरकार से अपने हक और सम्मान की मांग की गई…


बीजापुर(प्रभात क्रांति)। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों से शिक्षा की अलख जगा रहे अनुदेशकों ने एक बार फिर सरकार से अपने हक और सम्मान की मांग की है। बस्तर संभाग के अनुदेशकों ने अपनी चार सूत्रीय प्रमुख मांगों को लेकर मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपते हुए शासन का ध्यान अपनी जटिल परिस्थितियों और समस्याओं की ओर आकर्षित किया है। यह ज्ञापन बीजापुर तहसीलदार के माध्यम से प्रेषित किया गया।
अनुदेशक संघ का कहना है कि वे दुर्गम, संवेदनशील और नक्सल प्रभावित इलाकों में हजारों बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, बावजूद इसके उन्हें आज तक स्थायी शिक्षक का दर्जा नहीं दिया गया। और अधीक्षकों के द्वारा प्रताडित करना अनुदेशक से कार्य मुक्त की बात करना! वर्षों से अल्प मानदेय में कार्य कर रहे ये अनुदेशक अब अपने भविष्य को लेकर गहरी चिंता में हैं। 
शिक्षक भर्ती में टीईटी शिथिल कर मर्ज अथवा नियमितीकरण की मांग-
अनुदेशक संघ की सबसे प्रमुख मांग आगामी शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी है। संघ ने मांग की है कि सभी अनुदेशकों को टीईटी (TET) में शिथिलता प्रदान करते हुए उन्हें शिक्षक पद पर मर्ज अथवा नियमित किया जाए। संघ का तर्क है कि वर्षों का शिक्षण अनुभव रखने के बावजूद केवल तकनीकी कारणों से उन्हें नियमित शिक्षक बनने से वंचित किया जा रहा है, जो पूर्णतः अन्यायपूर्ण है।
मानदेय बढ़ाकर 40 हजार करने की मांग-
अनुदेशकों ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के पीएबी (PAB) में उनके मानदेय को वर्तमान 16,000 रुपये से बढ़ाकर 40,000 रुपये किए जाने हेतु केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की मांग की है। अनुदेशकों का कहना है कि वे पूर्णकालिक कार्य करते हैं, लेकिन उन्हें आज भी “पार्ट-टाइम शिक्षक” बताकर बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है, जो उनके श्रम और जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है।
24 घंटे की सेवा बाध्यता से मुक्त करने की मांग-
अनुदेशक संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि शासन को जमीनी हकीकत से अवगत कराया जाए। संघ का कहना है कि अनुदेशकों से 24 घंटे सेवा की अपेक्षा की जाती है, जो व्यावहारिक और मानवीय नहीं है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें केवल कार्यालयीन समय में ही कार्य करने की अनुमति दी जाए और अतिरिक्त जिम्मेदारियों से मुक्त रखा जाए।
आंदोलन की चेतावनी-
अनुदेशक कल्याण संघ बस्तर संभाग ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी चार सूत्रीय मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे अन्य वैधानिक और लोकतांत्रिक विकल्पों पर विचार करने के लिए विवश होंगे। संघ ने यह भी कहा कि मांगें पूरी न होने की स्थिति में आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।
सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें-
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा की रीढ़ बने इन अनुदेशकों की मांगों पर सरकार कब और क्या कदम उठाती है। वर्षों से सेवा दे रहे इन शिक्षकों को न्याय मिलता है या फिर उन्हें एक और आंदोलन की राह पर उतरना पड़ेगा, यह आने वाला समय बताएगा।




