महा शिवरात्रि पर दलपत सागर शिव मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, शहर से लेकर गांव-गांव तक गूंजा ‘हर-हर महादेव’…देखें वीडियों:-


जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । महा शिवरात्रि के पावन अवसर पर जगदलपुर शहर सहित पूरे बस्तर अंचल में शिवभक्ति की अद्भुत छटा देखने को मिली। शहर के मध्य स्थित ऐतिहासिक दलपत सागर के बीच बने प्राचीन शिव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। बस्तर नरेश दलपत देव द्वारा निर्मित इस मंदिर में भक्तों ने जलभिषेक, बेलपत्र अर्पण और रुद्राभिषेक कर भगवान भोलेनाथ से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। मंदिर परिसर घंटियों की ध्वनि और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरे दिन गूंजता रहा ।

इस बार केवल शहर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी महाशिवरात्रि को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला । जगदलपुर के समिपस्त ग्राम कुम्हरावण्ड के कुम्डेश्वर महादेव में श्रद्वालुओं की काफी भीड़ देखने को मिला यहां सुबह से ही ग्रामीणों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों, नव विहाहिता एवं पति-पत्नि बड़ी संख्या में पहुंचकर पूजा अर्चना किया वही कुम्हरावंड के जलकुंड महादेव मंदिर में ग्रामीणों ने पारंपरिक पूजा कर प्रसाद वितरण किया, वहीं भजन-कीर्तन, सामूहिक जलाभिषेक व रात्रि जागरण आयोजित कर रामचरित्र मानस का अखण्ड रामायण आयोजत कर गांव की सुख-समृद्धि की कामना की,
जनपद पंचायत बाकावण्ड के ग्राम गुमडेल में मंदिर में नव कलेवर होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे जिससे लोग बारी-बारी शिव जी की दर्शन करने पहुंचे वही छोटे-छोटे बच्चों का मुण्डन भी कराया गया । वही राम चरित्र. मानस का अखण्ड पाठ किया गया शिवरात्रि के दूसरी दिन भी यह कार्यक्रम यथावत रखनी की बात कही गई । श्रद्धालु यहां रात में दिया जालकर भक्त में लिन रहे रात्रि में रामचरित्र मानस का अखण्ड रामायण किया गया ।
जगदलपुर नगर निगम द्वारा दलपत सागर स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए नाव की व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से दर्शन कर सके। पुलिस प्रशासन ने सीएसपी महेश्वर नाग के नेतृत्व में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए और पूरे दिन व्यवस्था बनाए रखी। सामाजिक संगठनों एवं दलपत बचाव अभियान समिति द्वारा भंडारे का आयोजन कर श्रद्धालुओं को खिचड़ी, पूड़ी-सब्जी, प्रसाद और पेयजल वितरित किया गया, जिससे दूर-दराज से आए भक्तों को विशेष सुविधा मिली।
पूरे दिन क्षेत्र का वातावरण शिवमय बना रहा । गांव-गांव के मंदिरों में दीप प्रज्वलित हुए, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण हुए तथा श्रद्धालुओं ने भगवान शिव से परिवार, गांव और बस्तर क्षेत्र की शांति एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना की। महा शिवरात्रि का यह पर्व शहर और ग्रामीण अंचल के लिए आस्था, परंपरा और सामूहिक सहभागिता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया ।
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