छत्तीसगढ़

14 साल पुराने प्रस्ताव पर आधारित कोरंडम खदान स्वीकृति अवैध: PESA कानून का घोर उल्लंघन है – विक्रम मंडावी 

भाजपा की डबल इंजन सरकार आदिवासियों के अधिकारों का हनन कर बस्तर की जमीन और खनिज संसाधन रसूखदारों को सौंप रही है – विक्रम मंडावी

बीजापुर(प्रभात क्रांति) । जिला खनिज अधिकारी बीजापुर द्वारा जारी हालिया बयान पर गंभीर आपत्ति दर्ज करते हुए बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने जिला खनिज अधिकारी द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाया है, उन्होंने कहा कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जानबूझकर की जा रही उपेक्षा को छिपाने की कोशिश भाजपा की डबल इंजन की सरकार और जिला प्रशासन कर रही है। भाजपा सरकार बस्तर के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को रसूखदारों और उद्योगपतियों को सौंपने की साजिश रच जा रही है, और इसे “कानूनी” दिखाने के लिए झूठे तर्क गढ़ रही है। उक्त बातें विधायक विक्रम मंडावी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही है।

विधायक विक्रम मंडावी ने अपने प्रेस विज्ञप्ति में आगे कहा कि बीजापुर जिला पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाला अनुसूचित क्षेत्र है, जहां PESA एक्ट 1996 (पंचायतों का विस्तार अनुसूचित क्षेत्रों तक अधिनियम) लागू है। इस कानून के अनुसार, अनुसूचित क्षेत्रों में गौण खनिजों (जिसमें कोरंडम शामिल है) के लिए पट्टा या लीज देने से पहले ग्राम सभा की पूर्व अनुशंसा अनिवार्य है। विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि प्रशासन दावा कर रहा है कि ग्राम पंचायत रुद्रारम और जनपद पंचायत भोपालपटनम के 25 मार्च 2011 के प्रस्ताव के आधार पर अनापत्ति ली गई थी।

लेकिन यह प्रस्ताव 14 साल पुराना है! इतने वर्षों बाद 2025 में खदान स्वीकृति देते समय वर्तमान ग्राम सभा की सहमति क्यों नहीं ली गई? PESA के छत्तीसगढ़ नियमों (जैसे छत्तीसगढ़ माइनर मिनरल रूल्स 2015) में स्पष्ट है कि ग्राम सभा की पूर्व अनुशंसा अनिवार्य है। पुराने प्रस्ताव को आधार बनाकर नई स्वीकृति देना कानून की आंखों में धूल झोंकने जैसा है।

सरकार जानबूझकर ग्राम सभा को बाइपास कर रही है ताकि आदिवासियों की आवाज दबाई जा सके।
विधायक विक्रम मंडावी ने अपने प्रेस विज्ञप्ति में आगे कहा कि विभाग कह रहा है कि 5.0 हेक्टेयर से कम क्षेत्र होने और क्लस्टर न होने से जनसुनवाई अनिवार्य नहीं है। यह आंशिक रूप से सही लग सकता है, लेकिन EIA अधिसूचना 2006 (और उसके संशोधनों) के तहत गौण खनिजों की सभी खदानों (5 हेक्टेयर से कम भी) के लिए पर्यावरण स्वीकृति (EC) अनिवार्य है, और B2 कैटेगरी में DEAC/DEIAA द्वारा मूल्यांकन होता है। लेकिन PESA वाले अनुसूचित क्षेत्रों में जनसुनवाई और ग्राम सभा की सहमति पर्यावरण प्रक्रिया से अलग नहीं है – यह अतिरिक्त सुरक्षा है। 3.70 हेक्टेयर क्षेत्र होने के बावजूद, आदिवासी बहुल इलाके में ऐसी खदान से जंगल, पानी और आजीविका पर गहरा असर पड़ेगा। बिना स्थानीय लोगों की सुनवाई के यह स्वीकृति अवैध और एकतरफा है।

विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि “भाजपा की डबल इंजन की सरकार और प्रशासन यह बात जानबूझकर छुपा रही है कि 5 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि के लिए अलग नियम हैं, लेकिन यहां छोटे-छोटे टुकड़ों में खदानें देकर पर्यावरण नियमों को चकमा दिया जा रहा है। यह भाजपा सरकार की साजिश है।” उन्होंने आगे कहा बड़े क्षेत्रों को टुकड़ों में बांटकर, बिना जनसुनवाई के, रसूखदारों और कॉर्पोरेट हितों को खदान सौंप कर बस्तर के आदिवासियों को विकास के नाम पर विस्थापित किया जा रहा है, उनकी जमीन छीनी जा रही है।

विधायक विक्रम मंडावी ने भाजपा की डबल इंजन की सरकार और प्रशासन से मांग करते हुए कहा है कि, इस पर्यावरण स्वीकृति (EC Identification No. EC25C0108CG5605160N, पत्र क्रमांक SEIAA/C.G./Mines/520996/2025 दिनांक 20.12.2025) को तत्काल रद्द किया जाए।

ग्राम कुचनूर की ग्राम सभा की बैठक बुलाकर उनकी स्पष्ट सहमति ली जाए, जैसा PESA कानून में अनिवार्य है। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से दोबारा शुरू की जाए, जिसमें जनसुनवाई और ग्राम सभा की भूमिका सुनिश्चित हो।विधायक विक्रम मंडावी ने अपने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से यह भी कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो, भाजपा सरकार जो लगातार आदिवासियों को विकास के नाम पर धोखा देने का काम रही है। बस्तर के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों को बचाने के लिए आने वाले समय में आदिवासियों के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button