छत्तीसगढ़

हिंसा से विश्वास की ओर : 21 इनामी माओवादी कैडरों ने छोड़ा हथियार, ‘पूना मारगेम’ अभियान की बड़ी सफलता….

जगदलपुर (प्रभात क्रांति)। सुकमा जिले में नक्सल उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। दिनांक 07 फरवरी 2026 को कुल 76 लाख रुपये के इनामी 21 सक्रिय माओवादी कैडरों ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। यह आत्मसमर्पण छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति तथा पुलिस प्रशासन द्वारा संचालित “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान से प्रभावित होकर किया गया।

आत्मसमर्पित माओवादियों में 3 डीवीसीएम, 5 एसीएम और 13 पार्टी सदस्य शामिल हैं, जिनमें 14 महिलाएं भी हैं। ये सभी दरभा डिवीजन, दक्षिण बस्तर डिवीजन, एओबी डिवीजन, केकेबीएन (ओड़िशा) तथा इंद्रावती एरिया कमेटी में सक्रिय रूप से कार्यरत थे। आत्मसमर्पण के दौरान उनके पास से AK-47, एसएलआर, इंसास, बीजीएल लांचर सहित भारी मात्रा में गोला-बारूद भी बरामद किया गया।

यह आत्मसमर्पण बस्तर रेंज पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज (आईपीएस), पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण (आईपीएस), डीआईजी सीआरपीएफ आनंद सिंह राजपुरोहित, एसडीओपी कोंटा प्रशांत देवांगन एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष किया गया। अधिकारियों के अनुसार नए सुरक्षा कैंपों की स्थापना, सड़क कनेक्टिविटी में विस्तार, लगातार सफल नक्सल विरोधी अभियानों और जनहितकारी योजनाओं की पहुंच से माओवादियों का स्वतंत्र विचरण क्षेत्र सिमट गया है, जिससे संगठन में तेजी से मोहभंग बढ़ रहा है।

पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण ने बताया कि 21 माओवादियों का हथियारों सहित आत्मसमर्पण सुकमा जिले में शांति और विकास की दिशा में निर्णायक बदलाव का संकेत है। उन्होंने शेष सक्रिय माओवादियों से अपील की कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर आत्मसमर्पण करें, पुलिस उन्हें सुरक्षा, पुनर्वास और सम्मानजनक भविष्य प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

वहीं बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक पी. सुंदरराज ने कहा कि यह आत्मसमर्पण बस्तर में शांति स्थापना की दिशा में एक बड़ी सफलता है। सुरक्षा बलों की सतत कार्रवाई, विकास योजनाओं की बढ़ती पहुंच और जनता के बढ़ते विश्वास से माओवादी संगठन की जड़ें कमजोर हो रही हैं। उन्होंने शेष कैडरों से भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।

प्रशासन ने बताया कि आत्मसमर्पित कैडरों को शासन की नीति के अनुसार पुनर्वास, आर्थिक सहायता तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। लगातार आत्मसमर्पण और विकास कार्यों की पहुंच से क्षेत्र में विश्वास का वातावरण बन रहा है और बस्तर में शांति की उम्मीद मजबूत होती दिखाई दे रही है।

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