छत्तीसगढ़

बसंत पंचमी के पावन अवसर पर पंडरीपानी में ‘‘मावली भाठीन आमाबुदीन पिरंन्ता माता मंदिर’’ का हुआ प्राण-प्रतिष्ठा, बस्तर की परंपरागत आस्था का हुआ भव्य दर्शन….देखें वीडियों

जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । बस्तर अंचल अपनी विशिष्ट धार्मिक, सांस्कृतिक और परंपरागत आस्थाओं के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखता है । यहां आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के साथ-साथ अनेक देवी-देवताओं की परंपरागत पूजा-अर्चना, सिरहा-बुनिया परंपरा और लोक आस्था आज भी जीवंत रूप में प्रचलित है । बस्तर में किसी भी शुभ कार्य से पूर्व देवी-देवताओं की आराधना कर उनकी अनुमति लेना सदियों पुरानी परंपरा रही है ।

इसी परंपरा के निर्वहन में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर ग्राम पंडरीपानी में ‘‘मावली भाठीन आमाबुदीन पिरंन्ता माता मंदिर’’ की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हुई । ग्राम निवासी ललित कुमार मंडावी, जिन्होंने माता की सेवा और साधना के माध्यम से सिरहा का दर्जा प्राप्त किया है, उनके नेतृत्व में यह धार्मिक आयोजन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया । ललित कुमार मंडावी अपने पिता के साथ लंबे समय से बस्तर की परंपरागत देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना और लोक विश्वास से जुड़े अनुष्ठानों का निर्वहन कर रहे हैं।

प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान माता का आह्वान कर परंपरागत विधि से पूजा-पाठ किया गया । प्रथम पूजा के अवसर पर अनेक कठिन साधनाओं के माध्यम से माता को अपने शरीर में वास कराकर सिरहा परंपरा के अनुसार अनुष्ठान संपन्न किया गया । बसंत पंचमी के अवसर पर माता की जात्रा एवं बली की परंपरा भी निभाई गई, जो बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग मानी जाती है ।

इस पावन आयोजन में ग्राम परगना के देवी-देवताओं का आह्वान कर सामूहिक रूप से पूजा की गई तथा सम्पूर्ण बस्तर की सुख-समृद्धि, शांति और संस्कृति की रक्षा के लिए विशेष प्रार्थना की गई । आयोजन के दौरान बस्तर की पारंपरिक धार्मिक आस्था, सिरहा-बुनिया परंपरा और लोक विश्वास का जीवंत रूप देखने को मिला ।

ग्रामीणों ने इस अवसर को बस्तर की धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने वाला ऐतिहासिक और पुण्यकारी आयोजन बताया तथा माता से क्षेत्र की खुशहाली और जनकल्याण की कामना की ।

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