शिक्षा या शोषण? आदिवासी आवासीय विद्यालय में बच्चों से कराए जा रहे काम का खुलासा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय, केसकुतुल में गंभीर लापरवाही उजागर…. देखें वीडियो


बीजापुर (प्रभात क्रांति)। जिले के भैरमगढ़ क्षेत्र अंतर्गत केसकुतुल ग्राम स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस आदिवासी आवासीय विद्यालय से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां शिक्षा और देखरेख के नाम पर आदिवासी बच्चों से कथित रूप से श्रमिकों जैसा काम करवाए जाने का खुलासा हुआ है।
प्रभात क्रांति न्यूज पत्रिका की टीम द्वारा विद्यालय का निरीक्षण किए जाने पर कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं, जिनसे विद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सफाई कर्मचारियों के बावजूद बच्चों से करवाई जा रही सफाई
जानकारी के अनुसार विद्यालय में लगभग 15 सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, इसके बावजूद परिसर की साफ-सफाई, बाथरूम की धुलाई और अन्य दैनिक कार्य आदिवासी छात्रों से करवाए जा रहे हैं।
विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों ने बताया कि उन्हें नियमित रूप से झाड़ू लगाने, शौचालय साफ करने और परिसर की सफाई करने के लिए मजबूर किया जाता है।
बच्चों का आरोप है कि यदि वे इन कार्यों को करने से मना करते हैं, तो उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।
बच्चों से खाना बनवाने और मुर्गा काटने तक का आरोप
न्यूज टीम द्वारा बच्चों से बातचीत के दौरान यह भी सामने आया कि छात्रों से रसोई से जुड़े कार्य भी करवाए जाते हैं।
बच्चों के अनुसार उनसे:
- खाना बनवाया जाता है
- सब्जी कटवाई जाती है
- यहां तक कि मुर्गा काटने जैसे कार्य भी करवाए जाते हैं
जो कि एक आवासीय विद्यालय के नियमों और बाल संरक्षण मानकों के विरुद्ध माना जा रहा है।
350 बच्चों के लिए बदहाल स्वच्छता व्यवस्था
विद्यालय में लगभग 350 छात्र-छात्राएं निवास करते हैं, लेकिन बाथरूम और स्वच्छता व्यवस्था बेहद खराब बताई जा रही है।
बच्चों ने बताया कि शौचालय इतने गंदे रहते हैं कि कई छात्र विद्यालय की लगभग 7 फीट ऊंची बाउंड्री कूदकर बाहर शौच के लिए जाने को मजबूर** हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है बल्कि किसी बड़ी दुर्घटना को भी आमंत्रण दे सकती है।
अधीक्षक के बयान ने बढ़ाया विवाद
विद्यालय के अधीक्षक पोदियाराम कवासी से जब न्यूज टीम ने आरोपों को लेकर सवाल किए, तो उनका जवाब और भी विवादित बताया जा रहा है।
न्यूज टीम के अनुसार अधीक्षक ने कहा कि:
“आपके न्यूज चैनल द्वारा मेरे खिलाफ चलाई जाने वाली खबरों से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, और यदि मुझे पद से हटाया भी जाता है तो उससे भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा।”
इस बयान के बाद प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल
घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं कि:
- क्या विद्यालय में कर्मचारियों की मनमानी इसी तरह चलती रहेगी?
- क्या शिक्षा के नाम पर आदिवासी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है?
- क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर किसी प्रभावशाली व्यक्ति या राजनीतिक संरक्षण का साया है?
- आखिर प्रशासन अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया?
आदिवासी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता
आदिवासी आवासीय विद्यालयों का उद्देश्य दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित वातावरण और उज्ज्वल भविष्य देना है। लेकिन यदि बच्चों से श्रम करवाने और उन्हें प्रताड़ित करने जैसे आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पूरी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला आदिवासी शिक्षा प्रणाली में विश्वास को गहरा आघात पहुंचा सकता है।
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