बस्तर में सड़क निर्माण में भारी अनियमितता, भ्रष्टाचार कर खुली लूट, करोड़ों की सड़कें एक साल भी नहीं टिक रहीं….


जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । बस्तर जिला आज देश में घटिया सड़क निर्माण का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभर रहा है। करोड़ों रुपयों की लागत से बनी सड़कें एक वर्ष भी नहीं टिक पा रही हैं, जिससे सरकारी विभागों और ठेकेदारों के बीच बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की पोल खुल रही है। विभागीय लापरवाही और नेताओं की अनदेखी के चलते आम जनता को लगातार दुर्घटनाओं, धूल, गड्ढों और टूटे रास्तों का सामना करना पड़ रहा है।
आजादी के 78 वर्ष बाद, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और पीडब्ल्यूडी विभाग के तहत बस्तर जिले में करोड़ों रुपये में कई सड़कों का निर्माण किया गया, लेकिन निर्माण पूर्ण होने के कुछ ही महीनों में सड़कों का डामर उखड़ना, गिट्टी बाहर आ जाना और धूल उड़ना आम बात बन चुकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है – ”ठेकेदारों द्वारा घटिया सामग्री का उपयोग और इंजीनियरों की मिलीभगत से सड़कें बनते ही टूट जाती हैं। फिर मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये दोबारा मंजूर किए जाते हैं और ठेकेदार को फिर से लाभ पहुंचाया जाता है, जो भ्रष्टाचार को साफ दर्शाता है।“ पत्रकारों द्वारा बार-बार इस मामले को उजागर करने के बावजूद संबंधित विभाग सिर्फ मौन दर्शक बने हुए हैं।
जगदलपुर से सटे उड़ीसा की तुलना में अंतर साफ दिखाई देता है। वहां सड़कें कई वर्षों तक बिना मरम्मत के टिकती हैं, क्योंकि वहां गुणवत्ता परीक्षण और सख्त निगरानी की व्यवस्था है। लेकिन बस्तर में एक साल से पहले ही सड़कें उखड़ने लगती हैं, जो सीधे-सीधे कमीशन आधारित ठेकेदारी प्रणाली की ओर इशारा करता है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत छेपड़ागुड़ा से बजावंड मार्ग की सड़क एक वर्ष पूरा होने से पहले ही जर्जर हो गई। इसके बाद फिर से करोड़ों का मरम्मत बजट स्वीकृत हुआ, लेकिन सड़क की हालत आज भी वैसी ही है।
इसी प्रकार दाबगुड़ा से बकावंड मार्ग पर डामर पेंट की परत जैसा पतला सड़क निर्माण किया गया है, जिस पर वाहन गुजरते ही धूल उड़ती है और गिट्टियाँ अलग हो जाती हैं तथा जगहदृजगह डामर उखड़ा हुआ देखा जा रहा है। करपावण्ड से जैबेल, जैबेल से भानपुरी मार्ग डबल लेन मार्ग निर्माण के कुछ दिन बाद डामर उखड़ना, गिट्टी बाहर निकल रहा है ग्रामीणों द्वारा मुरूम व मिट्टी डालकर पेंच का कार्य कर रहे है, किन्तु बार-बार टूट रहा है, जिससे निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठते हैं।
बीजापुर जिले में सड़क घोटाले को उजागर करने वाले पत्रकार मुकेश चंद्राकर की 3 जनवरी 2025 को संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर शव को सेप्टिक टैंक में फेंक दिया गया था। यह घटना साबित करती है कि सड़क निर्माण घोटाला कितना गहरा और खतरनाक है, जिसमें प्रभावशाली ठेकेदारों की संलिप्तता है।
शासन को चाहिए कि इस पूरे मामले में तत्काल प्रभाव से उच्च-स्तरीय जांच कराई जाए, दोषी इंजीनियरों और ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, निर्माण गुणवत्ता की पारदर्शी जांच हो और जनता के धन की लूट को रोका जाए, ताकि भविष्य में सड़कों का निर्माण जनहित के लिए हो, न कि भ्रष्टाचार की कमाई का साधन बनकर ।





