09 अगस्त विश्व मूलनिवासी आदिवासी दिवस के अवसर पर बच्चों के साथ पौधारोपण, प्रकृति संरक्षण एवं संस्कृति बचाने का संकल्प…


जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । महेश स्वर्ण “एबोरिजिनल ट्राइब्स!” के नेतृत्व में विश्व मूलनिवासी आदिवासी दिवस के अवसर पर बच्चों और युवाओं के साथ पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों युवाओं एवं उपस्थित लोगों ने पौधे रोपित कर प्रकृति, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के संरक्षण का संकल्प लिया।
इस अवसर पर महेश स्वर्ण ने कहा कि प्रकृति केवल हमारे जीवन का आधार ही नहीं, बल्कि मूलनिवासी आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, जीवन-पद्धति और पहचान का अभिन्न हिस्सा है। जल, जंगल, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बिना आने वाली पीढ़ियों का सुरक्षित भविष्य संभव नहीं है।
उन्होंने बच्चों और युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि हमें अपनी नीति-नियम, परंपरा, रीति-रिवाज, भाषा, संस्कृति, लोकज्ञान और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की जीवन-पद्धति को संजोकर रखना होगा। आधुनिक विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक ज्ञान की रक्षा करना भी हमारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि आज का पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन, छाया, स्वच्छ हवा और पर्यावरण की सुरक्षा का आधार बनेगा। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प लेना चाहिए।
हक, अधिकार और कर्तव्य के प्रति जागरूक होने का आह्वान
महेश स्वर्ण ने कहा कि विश्व मूलनिवासी आदिवासी दिवस केवल शुभकामनाएं देने का अवसर नहीं है, बल्कि अपने संवैधानिक हक-अधिकारों, सामाजिक जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को समझने तथा समाज को जागरूक करने का अवसर भी है।
उन्होंने बच्चों और युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा प्राप्त करें, अपने अधिकारों को जानें, प्रकृति की रक्षा करें और अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा “प्रकृति हमारी माता है, संस्कृति हमारी पहचान है और अपने हक-अधिकारों की रक्षा करना हमारा दायित्व है। हमें अपनी जड़ों से जुड़कर प्रकृति, संस्कृति और समाज की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।”
कार्यक्रम के अंत में महेश स्वर्ण “एबोरिजिनल ट्राइब्स!” ने सभी मूलनिवासी आदिवासी भाइयों-बहनों, बच्चों, युवाओं एवं उपस्थित नागरिकों को 09 अगस्त विश्व मूलनिवासी आदिवासी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं तथा प्रकृति संरक्षण, सामाजिक एकता, सांस्कृतिक विरासत की रक्षा और अपने हक-अधिकार एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
मुख्य संकल्प
- अधिक से अधिक पौधारोपण एवं पौधों की देखभाल
- जल, जंगल और जमीन का संरक्षण
- आदिवासी परंपरा, रीति-रिवाज एवं संस्कृति का संरक्षण
- बच्चों एवं युवाओं को अपने इतिहास और अधिकारों के प्रति जागरूक करना
- सामाजिक एकता एवं भाईचारे को मजबूत करना
- अपने संवैधानिक हक-अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहना
- “प्रकृति बचाएं — संस्कृति बचाएं — अधिकार बचाएं — आने वाली पीढ़ी का भविष्य बचाएं।”





