शाला जतन योजना के अतिरिक्त कक्षों में धांधली का आरोप, पुट्टी-पॉलिश से छिपाई गई खामियां, शिक्षा विभाग कटघरे में….


जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । बस्तर जिला के जनपद पंचायत बकावंड क्षेत्र में मुख्यमंत्री शाला जतन योजना के तहत निर्मित अतिरिक्त सात कक्षों के निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं । मालगांव, परऊगुड़ा, जूनावानी, पाईकपाल, तूंगापाल, तारापुर और बनियागांव सहित कई स्कूलों में वर्ष 2023-24 के दौरान सात अतिरिक्त कक्ष बनाए गए, जिनका संचालन वर्ष 2026 में किया जा रहा है । लेकिन संचालन के साथ ही भवनों की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों ने नाराजगी जताते हुए निर्माण को बेहद कमजोर और मानकविहीन बताया है ।

ग्रामीणों का आरोप है कि भवन निर्माण कार्य गुणवत्ताहिन मटेयिल, सीमेंट, रॉड, ईट घटिया स्तर एवं और बेतरतीब तरीके से किया गया । ग्राम पंचायत गुमडेल के परऊगुड़ा पारा में बने अतिरिक्त शाला भवन में निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग किया गया तथा निर्माण के दौरान आवश्यक क्योरिंग पानी भी नहीं की गई । ग्रामीणों के शिकायत एवं समाचार प्रकाशन के बाद भी कोई अधिकारी इस ओर ध्यान नही दिया । परिणामस्वरूप दीवारों में दरारें, उखड़ता प्लास्टर और असमान फर्श जैसी खामियां साफ दिखाई दे रही हैं, जिससे भवन की मजबूती पर गंभीर संदेह उत्पन्न हो गया है ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण की कमियों को छिपाने के लिए भवन पर पुट्टी और रंग-रोगन कर उसे बाहर से आकर्षक दिखाने का प्रयास किया गया है । दरवाजे-खिड़कियों में भी घटिया सामग्री की देखा जा सकता है । ग्रामीणों के अनुसार यह भवन कागजों में मजबूत दिखाया जा रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावक चिंतित हैं ।
इस संबंध में निर्माण को लेकर पहले भी शिकायतें और समाचार प्रकाशित किए गए थे, जिसमें निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए थे । इसके बावजूद न तो तकनीकी जांच कराई गई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों या ठेकेदार के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई । आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण ठेकेदार पर कार्रवाई नहीं हो पाई और विभागीय स्तर पर मामले को नजरअंदाज कर दिया गया ।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा निर्माण को कम लागत में मजबूत बताकर अपनी उपलब्धि बताने की कोशिश की जा रही है, जबकि वास्तविकता में भवन में कई तकनीकी खामियां मौजूद हैं । उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस प्रकार की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यहां छोटे-छोटे बच्चे प्रतिदिन अध्ययन करते हैं ।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि आए दिन अन्य स्थानों पर भवन गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जिनमें मासूम बच्चे घायल या हताहत होते हैं , यदि समय रहते इन भवनों की जांच और मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है । लोगों ने आशंका जताई कि निर्माण में कमीशनखोरी के चलते गुणवत्ता से समझौता किया गया और वही पिछले बारिश में भी पानी टपकने की शिकातय की गई थी वर्तमान में गर्मी का मौसम होने पर भवन पर पुट्टी और रंग-रोगन कर उसे बाहर से आकर्षक दिखाकर इसका संचालन किया जा रहा है ।
ग्रामीणों और अभिभावकों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की तकनीकी जांच कराई जाए, दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भवनों की गुणवत्ता सुधारने के लिए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं ।




