सुविधाओं के अभाव में भी बीजापुर के खिलाड़ियों का कमाल जर्जर तहसील पारा भवन में प्रैक्टिस कर 5 खिलाड़ी पहुंचे नेशनल, बस्तर यूनिवर्सिटी ट्रायल में 8 में से 5 का चयन, 2007 से नक्सल गढ़ में खेल प्रतिभा गढ़ रहा है पंजीकृत जूडो-कराते संघ


बीजापुर (प्रभात क्रांति) एक तरफ नेशनल में चयन का जश्न, दूसरी तरफ प्रैक्टिस के लिए छत तक नहीं… यही है बीजापुर के खेल का सच।
शहीद महेंद्र कर्मा बस्तर विश्वविद्यालय जगदलपुर में 12 अक्टूबर 2026 को हुए ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के सिलेक्शन ट्रायल में बीजापुर जिला जूडो संघ व बीजापुर कराते संघ के 8 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जिसमें 5 ने राष्ट्रीय स्तर पर क्वालीफाई कर जिले का परचम लहराया है।
चयनित सितारे कराते में रितेश कट्टम, श्रद्धा डोडी, श्यामा और जूडो में श्यामा एंजा, रोशनी चिडेम। ये अब राष्ट्रीय मंच पर बस्तर यूनिवर्सिटी का प्रतिनिधित्व करेंगे।
लेकिन इस सफलता के पीछे संघर्ष की लंबी कहानी है…
पंजीकृत बीजापुर जूडो संघ व कराते संघ के ये खिलाड़ी आज भी जर्जर तहसीलपारा भवन में प्रैक्टिस करने को मजबूर हैं। प्रशिक्षण स्थल और खुद के भवन के अभाव में पिछले कई सालों से जिले की प्रतिभाएं बाहर निकलने से वंचित हो रही हैं।
बताया जाता है कि संघ के नाम से बने पुराने भवन पर कब्जा होने के बाद से संस्था अपने खुद के भवन के लिए दर-दर भटक रही है।
गौरतलब है कि यही वह पंजीकृत संस्था है जिसने 2007 में जब बीजापुर को नक्सली गढ़ माना जाता था, तब से स्कूली बच्चों और स्थानीय युवाओं में छिपी प्रतिभा को तराशने का काम शुरू किया था। शुरुआती दौर में तत्कालीन कलेक्टरों व पुलिस अधीक्षकों के सहयोग से खिलाड़ी आगे बढ़े। इस दौरान कुछ खिलाड़ी अच्छी प्रदर्शन व खेल के दम पर चयनित होकर साई सेंटर कदीवली मुंबई में प्रशिक्षण ले रहे थे, तब स्पोर्ट्स अकादमी तक नहीं थी, बावजूद इसके इसी खेल के माध्यम से कई बच्चे जिला, संभाग और राज्य व राष्ट्रीय स्तरीय तक पहुंचे और मेडल लाए।
जूडो व कराते संघ की उपलब्धियों को देखते हुए तत्कालीन कलेक्टर अय्यास तंबोली के दुर्दशी सोच व प्रयास से स्पोर्ट्स अकादमी का नींव रखी गई थी।
बिना हॉल के ये 5 खिलाड़ियों का नेशनल तक पहुंचना, सिस्टम पर बड़ा सवाल भी है और बीजापुर के जज्बे का सबूत भी।




