आदिवासी छात्र-छात्राओं के छात्रावासों में बदहाली, टॉयलेट चोक और दरवाजे गायब, जिम्मेदार बेपरवाह…

जगदलपुर (प्रभात क्रांति)। बस्तर जिला जगदलपुर के संवेदनशील व दूरस्थ इलाकों जैसे बास्तानार, दरभा, तोकापाल और बकावंड में आदिवासी बच्चों को सुरक्षित माहौल में बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से शासन द्वारा संचालित आवासीय योजनाएं शिक्षा के क्षेत्र में कारगर साबित हो रही हैं। इन छात्रावासों से प्रतिवर्ष होनहार छात्र पढ़कर निकल रहे हैं और उच्चतर माध्यमिक शिक्षा के बाद आत्मनिर्भर बनकर समाज व देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान दे रहे हैं।

लेकिन इसके उलट, छात्रावासों की बुनियादी सुविधाओं और साफ-सफाई को लेकर जिम्मेदारों की घोर लापरवाही सामने आ रही है। ब्लॉक मुख्यालय बड़े किलेपाल स्थित प्री-मैट्रिक बालक छात्रावास सहित क्षेत्र के अधिकांश पोटाकेबिन व छात्रावासों में शौचालयों की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है।
शौचालयों में दरवाजे नहीं, सेप्टिक टैंक भी फुल
छात्रावासों में बने शौचालयों के सेप्टिक टैंक भर चुके हैं और सीट चोक पड़ी हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई शौचालयों में दरवाजे तक नहीं लगे हैं, जिसके कारण छात्रों को बिना दरवाजों के ही शौच जाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। घनी आबादी वाले क्षेत्रों में स्थित इन परिसरों में दरवाजे न होने से छात्रों को बारी-बारी से पहरा देकर जाना पड़ता है।
छात्रावासों में साफ-सफाई, नियमित मेंटेनेंस और जरूरी सुविधाओं के अभाव पर छात्रावास अधीक्षक और संबंधित जवाबदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। शासन स्तर से योजनाओं और कार्यक्रमों का संचालन तो किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर विद्यार्थियों की मूलभूत समस्याओं की सुध लेने वाला कोई नहीं है। छात्रों की बुनियादी गरिमा और स्वास्थ्य से जुड़ा यह मामला अब एक गंभीर सवाल बन चुका है।




