दंतेवाड़ा कलेक्टर कार्यालय की लिफ्ट बनी कूड़ेदान का केंद्र, रखरखाव के अभाव में बदहाल हो रहा करोड़ों का भवन….


तरुण पाढ़ी की रिपोर्ट
दंतेवाड़ा (प्रभात क्रांति)। जिले के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र कलेक्टर कार्यालय की व्यवस्थाएं इन दिनों सवालों के घेरे में हैं। करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित तीन मंजिला यह भवन जिले के प्रमुख प्रशासनिक कार्यों का केंद्र है, जहां विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी बैठकर पूरे जिले के कामकाज का संचालन करते हैं। इसके बावजूद कार्यालय परिसर में रखरखाव की कमी साफ नजर आ रही है। लंबे समय से बंद पड़ी लिफ्टों के आसपास कचरा जमा होने से वे अब कूड़ेदान का रूप लेती दिखाई दे रही हैं।
बताया जा रहा है कि कलेक्टर कार्यालय भवन में लगी लिफ्टें लंबे समय से बंद हैं। इनके उपयोग में नहीं आने के कारण आसपास गंदगी और कचरा जमा होता जा रहा है। वहीं भवन के कई हिस्सों में उचित रखरखाव का अभाव दिखाई देता है। कुछ कमरे खाली पड़े हैं तो कई कमरों में लंबे समय से ताले लटके हुए हैं। इससे कार्यालय में आने वाले आम लोगों के साथ-साथ कर्मचारियों को भी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। जिस भवन से जिले के महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय और योजनाओं का संचालन होता है, उसी परिसर की यह स्थिति व्यवस्था और रखरखाव पर सवाल खड़े कर रही है।
दंतेवाड़ा लंबे समय से दक्षिण बस्तर के महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान रखता आया है। सुकमा और बीजापुर जैसे क्षेत्रों से भी इसका प्रशासनिक जुड़ाव रहा है और वर्तमान में संभागीय मुख्यालय जगदलपुर होने के बावजूद दंतेवाड़ा की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में जिला मुख्यालय के प्रमुख प्रशासनिक भवन की लिफ्टों का वर्षों तक बंद रहना और उनका कूड़ेदान में तब्दील होना गंभीर विषय माना जा रहा है। ग्रामीणों और आम नागरिकों का सवाल है कि जब जिले का मुख्य प्रशासनिक भवन ही रखरखाव के अभाव से जूझ रहा है, तो अन्य सरकारी कार्यालयों की व्यवस्था किस स्थिति में होगी। अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन इस ओर गंभीरता से ध्यान देकर बंद लिफ्टों की मरम्मत, साफ-सफाई और पूरे भवन के समुचित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करे।





