आदिवासी की हितैषी सरकार में 15 वर्षों से आदिवासी कोटे पर जनरल वर्ग का कब्जा, दोषी साबित होने के बाद भी कार्रवाई ठप….

जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । बस्तर जिले की जनपद पंचायत बकावंड एक बार फिर गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर सुर्खियों में है । मामला एक ऐसे सहायक ग्रेड- 03 (बाबू) का है, जिसे आदिवासी कोटे पर बीजापुर जिला में नियुक्त किया गया था, जबकि वह जनरल वर्ग का है ।
उक्त पद की नियुक्ति उपरांत शिकायतें हुई, शिकायतें की जांच होने पर उनकी नियुक्ति पर संदेह गहराया और आनन-फानन में बाबू का स्थानांतरण कर उसे बीजापुर से जगदलपुर के बकावण्ड जनपद भेज दिया गया पुनः शिकायत होने पर बीजापुर जिला प्रशासन ने जांच शुरू की, जिसमें पाया गया कि आरक्षण नियमों एवं रोस्टर का पालन नहीं किया गया, अनियमित तरीके से नियुक्ति की गई और नियुक्ति में संबंधित अधिकारी – कर्मचारी की मिलीभगत सामने आई ।

जांच प्रतिवेदन बीजापुर कलेक्टर द्वारा बस्तर कलेक्टर को भेजा गया बस्तर कलेक्टर ने पुनः बीजापुर को कार्रवाई का दायित्व सौंपा बीजापुर कलेक्टर ने स्पष्ट उल्लेख किया कि ”कर्मचारी दोषी है, नियुक्ति आरक्षण नियमों के विरुद्ध है, और कर्मचारी वर्तमान में बस्तर में पदस्थ होने के कारण कार्रवाई वहीं की जानी चाहिए ।“
इसके बावजूद आज तक कोई कार्रवाई नहीं, बल्कि उल्टा संदिग्ध पदोन्नति दे दी गई, जो प्रशासकीय प्रक्रिया की पूरी पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा देती है ।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब पद विशेष रूप से आदिवासी आरक्षण के लिए निर्धारित था, तो आखिर किस नियम, किस धारा या किस संवैधानिक प्रावधान के तहत जनरल वर्ग के व्यक्ति को उस पद पर नियुक्त किया गया ? यह एक सोचनीय विषय है।
छत्तीसगढ़ में इस समय आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बाद भी यदि आदिवासी हितों के लिए सुरक्षित पदों पर जनरल व्यक्तियों को बैठाया जा रहा है, तो यह न केवल आरक्षण नीति का उल्लंघन है, बल्कि आदिवासी समाज के विश्वास के साथ सीधे अपमान के बराबर है ।
सूत्रों के अनुसार, उक्त कर्मचारी को भारतीय जनता पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं का संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण जांच रिपोर्ट स्पष्ट होने के बावजूद एवं दोष सिद्ध होने के बावजूद भी सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है ।





