पुस पूनी महोत्सव की तैयारी को लेकर बैठक सम्पन्न, भगवान जगन्नाथ के बस्तर आगमन के प्रथम पड़ाव की सदीदृपुरानी परंपरा फिर होगी जीवंत….


जगदलपुर (प्रभात क्रांति), बस्तर की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा और भगवान जगन्नाथ के बस्तर आगमन की ऐतिहासिक स्मृति को संजोए रखने वाले पुस पूनी महोत्सव की तैयारी हेतु जनपद पंचायत बकावंड अंतर्गत ग्राम पंचायत पीठापुर में एक महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई।
यह वही स्थान है जहाँ लगभग 600 वर्ष पूर्व बस्तर नरेश पुरूषोत्तम देव भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को पुरी से बस्तर लाते समय अपने लौह-लश्कर सहित प्रथम बार ठहरे थे। इस ऐतिहासिक पड़ाव की स्मृति आज भी बस्तर के जनजीवन, संस्कृति और आस्था में गहराई से रची-बसी है।
ऐतिहासिक कथा के अनुसार, पूर्णिमा की पावन रात्रि में भगवान जगन्नाथ के पीठापुर आगमन पर बस्तर के लिए समृद्धि, सौभाग्य और शांति का संकल्प लिया गया था उनके साथ आए 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समुदाय ने इसी स्थान पर विश्राम हेतु एक पवित्र भवन निर्मित किया, जहाँ आज भी भगवान जगन्नाथ की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है यह पूजा बस्तर क्षेत्र में अच्छी फसल, किसान कल्याण, सामाजिक सौहार्द और जनदृसमृद्धि के लिए समर्पित होती है ।
इसी परंपरा को जीवंत रखते हुए पुस पूनी महोत्सव हर वर्ष पूनी महत्सव 360 घर आरण्यक ब्राह्मण क्षेत्र क्रमांकदृ01 द्वारा भव्य रूप में आयोजित किया जाता है । महोत्सव में अखण्ड रामायण पाठ, सत्यनारायण कथा, विष्णु पूजा, तथा अन्य वैदिक अनुष्ठानों का विधिवत आयोजन किया जाता है ।
03 जनवरी 2026, शनिवार को मनाया जाएगा भव्य पुस पूनी महोत्सव
इस वर्ष महोत्सव को विशेष रूप से भव्य बनाने हेतु ग्राम मालगांव, गुमड़ेल, करीतगांव, परऊगुड़ा, पीठापुर, उलनार सहित आसपास के कई ग्रामों में बसे 360 घर आरण्यक ब्राह्मण ने सामूहिक बैठक कर तैयारियों की रूपरेखा निर्धारित की ।
सभी ग्राम से आये लोगों ने संकल्प लिया कि इस वर्ष का पुस पूनी महोत्सव पूर्व की तुलना में अधिक गरिमामय, श्रद्धामय और सांस्कृतिक सम्पन्नता के साथ आयोजित किया जाएगा ।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि पुस पूनी महोत्सव 03 जनवरी 2026, दिन शनिवार को भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा।
ग्रामीणों में उत्साह का विशेष वातावरण देखा जा रहा है और सभी समाज व समुदाय के लोग इस पवित्र आयोजन को सफल बनाने में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभा रहे हैं ।





