जनपद पंचायत बकावंड में सीईओ की निष्क्रियता से पंचायत सचिवों की दुर्दशा, 4 महीने में 52 सचिव प्रभावित….


जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । बस्तर जिला जगदलपुर के जनपद पंचायत बकावंड में प्रशासनिक अव्यवस्था और सीईओ की निष्क्रिय कार्यशैली को लेकर पंचायत सचिवों में भारी आक्रोश है। पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि नए निर्वाचित सरपंचों और सचिवों के बीच लगातार टकराव की स्थिति बन रही है, जिसका मूल कारण मुख्यालय में बैठा कमजोर प्रशासन है।
फंड की कमी का ठीकरा सचिवों पर फोड़ने का आरोप
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 के बाद, कई ग्राम पंचायतों में शासन से फंड आवंटन में देरी और निधि की अनुपलब्धता के कारण विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। इसी के चलते कई सरपंच, पंचायत सचिवों पर कार्रवाई की अनुचित मांग करते हुए उनके तबादले के लिए सीईओ को पत्र दे रहे हैं।
सचिवों का कहना है कि वास्तविक समस्या शासन-प्रशासन स्तर पर फंड उपलब्ध न होने की है, लेकिन सारा दबाव सचिवों पर डाला जा रहा है।
रिकॉर्ड संख्या में ट्रांसफर, सचिवों में असंतोष
जुलाई 2025 से नवंबर 2025 के बीच 52 पंचायत सचिवों को प्रभावित किया गया । यह पंचायती राज अधिनियम 1993 लागू होने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक संकट बताया जा रहा है । सामान्यतः हर वर्ष अधिकतम 10 प्रतिशत सचिवों का ट्रांसफर होता रहा है, लेकिन इस वर्ष यह आंकड़ा कई गुना बढ़ गया
सचिवों का आरोप है कि सीईओ द्वारा मनमानी और कुछ सचिवों से साठगांठ कर जिला पंचायत को प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं, जिससे प्रशासनिक असंतुलन बढ़ा है।
कई सचिव बिना सूचना और बिना कारण बताए स्थानांतरित किए गए हैं, जिससे 30 साल की सेवा में पहली बार यह स्तर की दुर्दशा देखने को मिली है। वही कई ऐसे सचिव है जो कई वर्षो से एक जगह पर टीके हुए है ।
सचिव/सरपंच विवाद में बढ़ी दूरी
नई स्थिति ने कई ग्राम पंचायतों में सरपंच और सचिव के बीच गंभीर असहमति पैदा कर दी है। सचिवों ने कहाें”सीईओ का काम प्रशासनिक संतुलन बनाना था, लेकिन उल्टा सरपंच और सचिवों के बीच अविश्वास और विवाद बढ़ा दिया गया है।“
सचिवों ने यह भी बताया कि कई मामलों में बिना भुगतान के कार्य करवाए गए और अब वसूली के प्रकरण राजस्व विभाग में भेजे जा रहे हैं, जबकि भुगतान जनपद से होना अभी शेष है।
केवल 21 सचिव बचे, कई पर एक से अधिक पंचायतों का भार
बकावंड में कुल 73 पंचायत सचिवों में से 52 प्रभावित हो चुके हैं। शेष 21 सचिवों पर 2 से 3 पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जिससे कार्य निष्पादन की गति और धीमी हो गई है नये सरपंचों में सरकार के प्रति अविश्वास बढ़ता जा रहा है । आज सभी सरपंच शासन को कोष रहे है मद की कमी के कारण ग्राम पंचायत के विकास की गति धीमी पड़ गई है ।





