बजावंड के दोनों शासकीय अस्पताल बेहाल – संसाधनों की कमी से ग्रामीण को नही मिल रहा बेहतर सुविधा….

जगदलपुर (प्रभात क्रांति)। बस्तर जिले के जनपद पंचायत बकावंड के अंतिम छोर पर स्थित बजावंड में दो शासकीय अस्पताल संचालित हैं, एक नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और दूसरा संजीवनी आयुर्वेदिक अस्पताल। दोनों अस्पताल एक-दूसरे के आमने-सामने हैं, लेकिन हालात इतने खराब हैं कि मरीजों को उचित उपचार तक नहीं मिल पा रहा है ।

लगभग दो वर्ष पूर्व कांग्रेस शासन में संजीवनी अस्पताल भवन में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बजावंड अस्पताल का उद्घाटन किया गया इसके उद्घाटन के समय तो कांग्रेस नेताओं की वाहवाही का केंद्र बना, लेकिन वर्तमान में रख-रखाव के अभाव में इसकी स्थिति जर्जर हो चुकी है। अस्पताल में जरूरी सामग्री तक नहीं है न अलमारी, न रैक, न ही मरीजों के बैठने की व्यवस्था । वहीं, संजीवनी आयुर्वेदिक अस्पताल की स्थिति भी इससे बेहतर नहीं है। यहाँ पांच पद होने के बावजूद केवल एक ही कर्मचारी श्रीमती ठाकुर नियमित रूप से उपस्थित रहती हैं, जबकि बाकी कर्मचारी अक्सर नदारद रहते हैं ।

नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नौ कर्मचारी पदस्थ हैं और डॉक्टर उमेश कुमार के नेतृत्व में अस्पताल किसी तरह संचालित हो रहा है। लेकिन सुविधाओं की भारी कमी के चलते मरीजों को अपेक्षित स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल पा रही है । अस्पताल सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक ही खुलता है, जिसके कारण आपात स्थिति में मरीजों को दर-दर भटकना पड़ता है ।


सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को मजबूरन झोला छाप डॉक्टरों का सहारा लेना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में झोला छाप डॉक्टरों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग अपनी विश्वसनीयता खोता जा रहा है ।

इसी तरह, मालगांव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति भी चिंताजनक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से अस्पताल केवल नाम मात्र के लिए खुला है। डॉक्टर अक्सर अनुपस्थित रहते हैं, और मरीज बिना इलाज के ही लौटने को मजबूर हैं ।
स्वास्थ्य सेवाओं की इस दुर्दशा ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक संसाधनों और जनबल की पूर्ति नहीं की जाती, तब तक ”स्वस्थ बस्तर“ का सपना अधूरा ही रहेगा ।





