छत्तीसगढ़

बकावंड विकासखंड के नंदीगुड़ा में अवैध रेती ढुलाई का खुला खेल, प्रशासन मौन…

जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । बकावंड विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत जैबेल के आश्रित ग्राम नंदीगुड़ा में इन दिनों अवैध रेती उत्खनन और ढुलाई खुलेआम एवं लगातार जारी है। ग्रामीणों के अनुसार प्रतिदिन भारी वाहनों और ट्रैक्टरों के माध्यम से नदी एवं आसपास के क्षेत्रों से नियमों को ताक पर रखकर रेती का उत्खनन किया जा रहा है। यह गतिविधि न केवल खनन नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण कानूनों के भी सीधे-सीधे खिलाफ है। इसके बावजूद अब तक संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध रेती ढुलाई के कारण गांव की सड़कों की हालत दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कें जर्जर हो चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही तेज रफ्तार ट्रैक्टरों के कारण दुर्घटनाओं की आशंका भी लगातार बनी हुई है।

पर्यावरणीय दृष्टि से भी यह अवैध उत्खनन गंभीर खतरा बनता जा रहा है। नदी किनारों का कटाव बढ़ रहा है, प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने की स्थिति उत्पन्न हो रही है और भविष्य में जलस्तर गिरने व जल संकट की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो इसका दुष्परिणाम पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ेगा।

मीडिया कर्मियों को धमकी, पांचवीं अनुसूची का हवाला देकर रोका गया

मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब नंदीगुड़ा में अवैध रेती ढुलाई की सूचना पर पहुंचे मीडिया कर्मी कि बाइक को कमलु कश्यप के द्वारा रोक दिया गया। आरोप है कि कुछ लोगों द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और कहा गया कि यह पांचवीं अनुसूची क्षेत्र है, इसलिए मीडिया को गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं है। आरोपियों ने यह भी कहा कि वे 200 रुपये की “रॉयल्टी” देते हैं, लेकिन जब उनसे कागजात दिखाने को कहा गया तो कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। केवल अवैध रूप से पैसा वसूले जाने की बात सामने आई।

इतना ही नहीं, एक ड्राइवर द्वारा वीडियो बनाकर उसे वायरल करने की धमकी देने की बात भी कही जा रही है। गौरतलब है कि जैबेल क्षेत्र से जुड़ा अवैध रेती उत्खनन का समाचार प्रकाशित हुए अभी एक सप्ताह भी नहीं हुआ है, इसके बावजूद अवैध खनन और ढुलाई का कार्य लगातार जारी है।

माइनिंग विभाग की चुप्पी पर सवाल

ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि माइनिंग विभाग की ओर से इस पूरे मामले में रहस्यमय खामोशी बनी हुई है। न तो नियमित निरीक्षण हो रहा है और न ही किसी प्रकार की कार्रवाई नजर आ रही है। ऐसे में लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत तो नहीं है। जल, जंगल और जमीन बचाने के नाम पर केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

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