बस्तर की 150 साल पुरानी मुरिया दरबार परंपरा को मिटाने की साजिश बर्दाश्त नहीं होगी — विधायक विक्रम मंडावी


बीजापुर (प्रभात क्रांति) । 75 दिन तक चलने वाले विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा के समापन पर होने वाले पारंपरिक मुरिया दरबार का नाम बदलने की कोशिश बस्तर की आदिम परंपरा, संस्कृति और ऐतिहासिक पहचान को मिटाने का घृणित और सुनियोजित षड्यंत्र है। यह भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं की ओर से बस्तर के आदिवासियों के अस्तित्व पर सीधा हमला है।
विधायक विक्रम मंडावी ने अपने विज्ञप्ति में कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासियों की आस्था, अस्मिता और जीवन का आधार है। विधायक विक्रम मंडावी ने अपने विज्ञप्ति में आगे कहा कि सिरहासार में लगने वाला मुरिया दरबार बस्तर रियासत की उस जीवंत लोक परंपरा का प्रतीक है, जिसमें मांझी-चालकी और आदिवासी समाज अपनी बात प्रशासन के सामने रखते थे। आज इसे “आम दरबार” कहकर मिटाने की कोशिश न केवल आदिवासियों का अपमान है, बल्कि माँ दंतेश्वरी का भी अपमान है।
विधायक विक्रम मंडावी ने आगे कहा कि भाजपा की यह सोच उसी मानसिकता का हिस्सा है, जो बस्तर की जल-जंगल-जमीन और आदिवासी संस्कृति को अपने हिसाब से तोड़-मरोड़ कर बदलना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा इससे पहले जगदलपुर का मशहूर माड़िया चौक का नाम बदला गया अब मुरिया दरबार का नाम बदला जा रहा है, नाम बदलना कोई छोटी बात नहीं है यह आदिवासियों के ऐतिहासिक पहचान को मिटाने का पहला कदम है।
विधायक विक्रम मंडावी ने प्रदेश के आदिवासी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मांग की है कि मुरिया दरबार का नाम बदलने का निर्णय तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए। सभी आधिकारिक दस्तावेजों, आमंत्रण पत्रों और कार्यक्रम सूची में केवल “मुरिया दरबार” ही लिखा जाए।अन्यथा इसे लेकर उग्र आंदोलन करेगा।




