छत्तीसगढ़

प्रधानमंत्री आवास योजना में कमीशन के खेल का आरोप, हितग्राही परेशान, किस्त नहीं मिलने से अधूरे पड़े आवास….

जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । बस्तर जिला जगदलपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की योजना संचालित की जा रही है। सरकार की ओर से जरूरतमंद परिवारों को आवास का लाभ देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन ग्राम पंचायत बजावण्ड में कुछ हितग्राहियों ने योजना की राशि और जियो टैंिकंग को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं । हितग्राहियों का कहना है कि आवास निर्माण पूरा होने के बाद भी उन्हें निर्धारित किस्त की राशि नहीं मिल पा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ।

ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत बजावण्ड में 100 से अधिक लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है। आरोप है कि कुछ हितग्राहियों की किस्त समय पर जारी हो रही है, जबकि अन्य हितग्राही आवास निर्माण पूरा करने के बाद भी भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। हितग्राहियों का कहना है कि जियो टैकिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण उनकी किस्त अटकी हुई है । इस संबंध में नीला पिता बाल सिंह, चंदर पति पिलू, गोवर्धन पति हीरा सिंह नायक, गुड्डू पिता निरंजन सहित अन्य हितग्राहियों ने राशि जारी कराने की मांग की है ।

अब तक हीरामणि एवं पति भगत बघेल को नही मिल पाया प्रधानमंत्री आवास

चंद्री बघेल पति सुरू जो अपने परिवार सहित उड़िसा से बजावण्ड आया है उसके परिवार के तीन लोगों को आवास प्रदान किया गया है ग्राम पंचायत इनपर हमेशा महेरबान रहता है और वही हीरामणि बघेल पति भगत बघेल जो मूलतः बजावण्ड के निवासी है उन्हें अब तक प्रधानंमत्री आवास से वंचित है ।

हीरामणि एवं पति भगत

हीरामणि बघेल पति भगत बघेल ने बताया कि लंबे समय से आवास की आवश्यकता होने के बावजूद उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पाया है । वर्तमान में वह अपने पति के साथ भाई के घर में रहने को मजबूर हैं, जहां सीलन की समस्या बनी हुई है । उनका कहना है कि आवास निर्माण के लिए उन्होंने संबंधित लोगों से संपर्क किया, लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल सका । ऐसे में उन्होंने शासन-प्रशासन से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत कराकर सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है ।

हितग्राहियों ने शासन से मांग की है कि प्रधानमंत्री आवास योजना की जियो टैगिंग एवं भुगतान प्रक्रिया की जांच कराई जाए और पात्र हितग्राहियों की लंबित किस्त जल्द उनके खातों में जारी की जाए । साथ ही यदि कमीशन के नाम पर किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई की जाए, ताकि योजना का वास्तविक लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुंच सके ।

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