छत्तीसगढ़

“पापा, इसे बचा लीजिए!” — नन्हीं बेटी की करुण पुकार ने बचाई कछुए की जान, सड़क से कछुए को सुरक्षित बचाकर वन विभाग को सौंपा, दूसरी कक्षा की छात्रा क्रितिका चौधरी की वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बनी प्रेरणा; केंद्रीय विद्यालय में प्राचार्य ने किया सम्मानित… देखें वीडियो – 

जगदलपुर (प्रभात क्रांति)। वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और जीवों की रक्षा का जज्बा उम्र का मोहताज नहीं होता। इसका प्रेरणादायक उदाहरण केंद्रीय विद्यालय सुकमा दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली नन्हीं छात्रा क्रितिका चौधरी ने पेश किया है। सड़क पर एक कछुए को देखकर उसकी सुरक्षा के लिए चिंता जताने और उसे सुरक्षित बचाकर वन विभाग को सौंपने के क्रितिका के मानवीय प्रयास की अब सराहना हो रही है।

क्रितिका चौधरी केंद्रीय विद्यालय, सुकमा में दूसरी कक्षा की छात्रा है। सोमवार को पढ़ाई पूरी करने के बाद वह सुकमा से अपने घर मलकानगिरी लौट रही थी। इसी दौरान अंतरराज्यीय राजमार्ग पर उसकी नजर सड़क पर चलते एक कछुए पर पड़ी।

क्रितिका ने आशंका जताई कि सड़क पर रहने से कोई वाहन उसे कुचल सकता है अथवा आवारा कुत्ते उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इतना ही नहीं, क्रितिका ने अपने पिता से यह चिंता भी व्यक्त की कि आसपास की बस्ती के कुछ लोग कछुए को पकड़कर मार सकते हैं और उसके मांस का सेवन कर सकते हैं। उसने अपने पिता से कछुए को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ने का आग्रह किया।

क्रितिका के पिता स्वयं पशु प्रेमी एवं पशु संरक्षण के प्रति समर्पित हैं। उन्होंने अपनी बेटी की संवेदनशीलता का समर्थन किया और उसके सहयोग से कछुए को सड़क से सुरक्षित बचाया। इसके बाद कछुए को मलकानगिरी वन क्षेत्र के अधिकारी श्री रमेश कुमार राउत को सौंप दिया गया। इस दौरान क्रितिका की बड़ी बहन आनंदमयी चौधरी भी उसके साथ मलकानगिरी वन क्षेत्र कार्यालय पहुंचीं।

कछुए को सुरक्षित बचाकर वन विभाग को सौंपने के इस सराहनीय कार्य के लिए वन क्षेत्र अधिकारी रमेश कुमार राउत ने क्रितिका और उसके परिवार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनकी प्रशंसा की। उन्होंने आम लोगों से अपील की कि सड़क या आबादी के आसपास कोई वन्यजीव दिखाई देने पर उसे नुकसान न पहुंचाएं, बल्कि इसकी सूचना नजदीकी वन विभाग कार्यालय को दें, ताकि वन्यजीवों को नियमानुसार सुरक्षित उनके प्राकृतिक आवास तक पहुंचाया जा सके।

विद्यालय में भी हुआ सम्मान

क्रितिका के इस सराहनीय कार्य की जानकारी मिलने पर केंद्रीय विद्यालय, सुकमा में प्रार्थना सभा के दौरान उसे मंच पर बुलाया गया। विद्यालय के प्राचार्य श्री दिनेश कुमार ने क्रितिका को सम्मानित कर उसका उत्साहवर्धन किया। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि किसी भी वन्यजीव के मिलने पर उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता दें और वन विभाग के अधिकारियों को सूचना देकर उसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास तक पहुंचाने में सहयोग करें।

एक छोटी-सी बच्ची की यह संवेदनशील पहल समाज को बड़ा संदेश देती है कि बेजुबान जीवों की रक्षा करना केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का मानवीय कर्तव्य भी है। क्रितिका चौधरी ने अपने कार्य से साबित कर दिया कि पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण की भावना बचपन से ही विकसित की जा सकती है।

देखें वीडियो – 

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