छत्तीसगढ़

एक वर्ष से बंद पड़ा सोलर जल संयंत्र, पानी के लिए तरस रहे ग्रामीण; आंगनबाड़ी और स्कूल भी प्रभावित

जगदलपुर (प्रभात क्रांति)। बस्तर जिले के तोकापाल विकासखंड अंतर्गत सरहदी ग्राम पंचायत मारेंगा के मुंडापारा में पिछले एक वर्ष से सोलर ऊर्जा आधारित पेयजल संयंत्र बंद पड़ा है। इसके चलते ग्रामीणों के साथ-साथ प्राथमिक शाला और आंगनबाड़ी केंद्र में अध्ययनरत बच्चों को भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़े संयंत्र की अब तक मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

जानकारी के अनुसार लगभग पांच वर्ष पूर्व पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए सरकार द्वारा यहां 5,000 लीटर क्षमता के दो सोलर ऊर्जा आधारित जल संयंत्र स्थापित किए गए थे। इन संयंत्रों के माध्यम से सोलर ऊर्जा से संचालित सबमर्सिबल पंप द्वारा पानी टंकी तक पहुंचाया जाता था, जिससे पूरे मुंडापारा मोहल्ले के लोगों के साथ-साथ प्राथमिक शाला और आंगनबाड़ी केंद्र में भी नियमित पेयजल उपलब्ध होता था।

पिछले एक वर्ष से तकनीकी खराबी के कारण दोनों संयंत्र बंद पड़े हैं, लेकिन संबंधित विभाग ने आज तक उनकी मरम्मत कराने की कोई पहल नहीं की। परिणामस्वरूप मोहल्ले के लोगों के साथ-साथ छोटे बच्चों और विद्यार्थियों को भी रोजाना पानी की समस्या झेलनी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र में हो रही है, जहां पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि बंद पड़े सोलर ऊर्जा संयंत्र की तत्काल मरम्मत कर उसे पुनः चालू कराया जाए, ताकि मोहल्लेवासियों, स्कूल के विद्यार्थियों और आंगनबाड़ी के बच्चों को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके। उनका कहना है कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा को लंबे समय तक अनदेखा करना ग्रामीणों और बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।

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