दिनों-दिन बढ़ रहा राशन दुकानों में भ्रष्टाचारी और कालाबाजारी एक व्यक्ति तीन-तीन दुकानों का मालिक…


जगदलपुर (प्रभात क्रांति)। बस्तर जिले के बकावंड जनपद पंचायत क्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की राशन दुकानों में कथित अनियमितताओं, कालाबाजारी और सामग्री की हेराफेरी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय संरक्षण के चलते राशन दुकानों में वर्षों से गड़बड़ियां हो रही हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से राशन दुकान में हेराफेरी को लेकर लगातार शिकायतें की जाती रही हैं। शिकायतों के बाद कुछ राशन दुकानों के विक्रेताओं को निलंबित भी किया गया, लेकिन उनके स्थान पर नए स्व-सहायता समूहों या पात्र स्थानीय लोगों को जिम्मेदारी देने के बजाय वही लोग अप्रत्यक्ष रूप से दुकानों का संचालन करते रहे।
ग्राम तारापुर के संचालक कमल बघेल, जिनकी पत्नी जनपद सदस्य हैं और भाजपा से जुड़ी बताई जाती हैं, उनके नियंत्रण में तीन-तीन राशन दुकानों का संचालन हो रहा है। आरोप है कि इन दुकानों का संचालन स्वयं करने के बजाय मजदूरों और कर्मचारियों के माध्यम से ठेके पर कराया जा रहा है। वहीं तुंगापाल में चावल की हेराफेरी की शिकायत के बाद विक्रेता को निलंबित किया गया था, जबकि बनियागांव और तारापुर में भी पहले कमल बघेल द्वारा राशन दुकानों का संचालन किए जाने की बात सामने आई है।
शासकीय राशन दुकानों को कुछ लोगों के लिए कमाई का जरिया बना दिया गया है। उनका कहना है कि स्थानीय पात्र समूहों और ग्रामीणों को दुकानों के संचालन का अवसर नहीं दिया जा रहा, जबकि एक ही व्यक्ति कई दुकानों का संचालन कर रहा है। इसके अलावा चावल के साथ-साथ अन्य राशन सामग्री के वितरण में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए जा रहे हैं।
कई राशन दुकानों में महीनों से लंबित चने का वितरण एक साथ होने के बावजूद उपभोक्ताओं को केवल एक माह का चना दिया गया, जबकि शेष मात्रा के वितरण पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य महीनों का चना हितग्राहियों तक नहीं पहुंचा। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी अनियमितताओं से शासन की छवि भी प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, एक व्यक्ति द्वारा कई राशन दुकानों के संचालन की व्यवस्था समाप्त करने, स्थानीय ग्रामीणों एवं पात्र स्व-सहायता समूहों को राशन दुकानों का संचालन सौंपने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।





