छत्तीसगढ़

गुड़ी पड़वा एवं उगादि पर्व – नववर्ष, नवसंस्कार और नई ऊर्जा का प्रतीक…

दंतेवाडा (प्रभात क्रांति) । भारत विविधताओं का देश है, जहाँ अलग-अलग राज्यों में एक ही भावना को अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण पर्व है गुड़ी पड़वा (महाराष्ट्र) और उगादि (दक्षिण भारत), जो हिंदू नववर्ष के आरंभ का प्रतीक है। यह पर्व मुख्यतः चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है और इसे नए साल की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।

पर्व का महत्व

गुड़ी पड़वा और उगादि का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए इसे सृजन और नवजीवन का प्रतीक माना जाता है। यह दिन नई शुरुआत, सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि का संदेश देता है।

गुड़ी पड़वा – विजय और समृद्धि का प्रतीक

महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन घर के बाहर “गुड़ी” (एक सजाया हुआ ध्वज) लगाया जाता है, जो विजय, सफलता और शुभता का प्रतीक होता है।

मुख्य परंपराएँ:

घरों की साफ-सफाई और रंगोली बनाना

दरवाजों पर आम और नीम के पत्तों की तोरण सजाना

गुड़ी स्थापित कर पूजा करना

विशेष व्यंजन जैसे पूरन पोली बनाना

गुड़ी को भगवान की कृपा और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।

उगादि – दक्षिण भारत का नववर्ष

कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह पर्व उगादि के रूप में मनाया जाता है। “उगादि” शब्द का अर्थ ही होता है – नए युग की शुरुआत।

मुख्य परंपराएँ:

घरों की सजावट और पूजा

पंचांग (नए वर्ष की भविष्यवाणी) सुनना

विशेष व्यंजन उगादि पचड़ी बनाना

उगादि पचड़ी में मीठा, खट्टा, कड़वा, तीखा, नमकीन – सभी स्वाद होते हैं, जो जीवन के विभिन्न अनुभवों (सुख-दुख) का प्रतीक हैं।

वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व

यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन का भी संकेत देता है, जब प्रकृति में नई ऊर्जा और हरियाली आती है। यह समय स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि मौसम बदलने के साथ शरीर को संतुलित रखने के लिए विशेष आहार लिया जाता है, जैसे नीम और गुड़ का सेवन।

संदेश और प्रेरणा

गुड़ी पड़वा और उगादि हमें सिखाते हैं कि हर नया साल नई उम्मीदें, नए लक्ष्य और नई शुरुआत लेकर आता है। यह पर्व हमें अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने, परिवार और समाज के साथ मिलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

निष्कर्ष

गुड़ी पड़वा और उगादि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि नवजीवन, संस्कृति और परंपरा का संगम हैं। यह दिन हमें अतीत से सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाने का अवसर देता है।

आप सभी को गुड़ी पड़वा एवं उगादि की हार्दिक शुभकामनाएँ!

गोंडवाना भवन दंतेवाड़ा में भव्य रूप से पर्व मनाया गया।

इसमें जिले जिला महार समाज (मराठी परिवारों ) इकाई दंतेवाड़ा कटेकल्याण, गीदम के जाति नायक पपैया मामड़ीकार, उप जाति नायक ओनेशवर झाड़ी, विशेष अतिथि रूप कुमार झाड़ी, कार्यक्रम में उपस्थित सदस्य रेवेंद्र झाड़ी, कृष्णा झाड़ी, तिरपरेश चपड़ी, अंजनी दुर्गम, देवेंद्र चपड़ी, देवेंद्र झाड़ी, चन्द्र प्रकाश कावरे, सुनील झाड़ी, पवन हल्लूर, राममूर्ति चिलमुल, निहाल, मैघंश मोरला, संजीव झाड़ी एवं सभी महार समाज दंतेवाड़ा कटेकल्याण, गीदम के पुरुष महिलाएं बच्चे थे।

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