“यूजीसी रेगुलेशन 2026 पर विवाद: भेदभाव रोकने के नाम पर एकतरफा ‘काला कानून’ का आरोप” – देखें वीडियो


जगदलपुर(प्रभात क्रांति) । उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव को रोकने के लिये यू.जी.सी. रेगुलेशन 2026 विनियमित किया गया है। कानून अपने आपमें ही भेदभावपूर्ण है। पहली बात तो यह है कि यू.जी.सी. एक्ट के कलिये ही नियम बनाये जा सकते है जातीय भेदभाव या उत्पीडन पर सीचे कोई नियम नहीं बनाये जा सकते है इसलिये यू.जी.सी. एक्ट के तहत बनाया गया यू.जी.सी. रेगुलेशन 2026 स्वतः में ही असंवैधानिक है।
यू.जी.सी. रेगुलेशन 2026 में बनाये गये नियमों में एस.सी./एस.टी.ओ.बी.सी./महिलाये एवं दिव्यांग के साथ किये गये भेदभाव को शामिल किया गया है उक्त कानून में जनरल केटेगरी को पीड़ित नहीं माना गया है उन्हें पहले से ही आरोपी मान लिया गया है। जनरल केटेगरी के साथ यदि भेदभावपूर्ण व्यवहार होता है तो उनके द्वारा शिकायत किये जाने के संबंध में कोई प्रावधान नहीं किया गया है।
यू.जी.सी. रेगुलेशन 2026 में भेदभाव के शिकायत होने पर शिकायत की जाँच इक्विटी कमेटी करेगी। इक्विटी कमेटी में जनरल केटेगरी के किसी सदस्य को रखे जाने का प्रावधान नहीं किया गया है जिसके कारण जनरल केटेगरी के साथ एकतरफा पक्षपातपूर्ण निर्णय किये जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
यू.जी.सी. रेगुलेशन 2026 में भेदभाव की शिकायत करने वाले व्यक्ति की शिकायत को जाँच में यदि झूठी पाई जाती है तो शिकायतकर्ता के विरुद्ध कार्यवाही का प्रावधान नहीं किया गया है।
यू.जी.सी. रेगुलेशन 2026 के नियमों में नियम तोडनें पर संबंधित उच्च शिक्षण संस्थान का ग्रांट रोकने तथा मान्यता रद्ध करने का प्रावधान किया गया है। उच्च शिक्षण संस्थानों के विरुद्ध किये गये सजा के प्रावधान के भय से शिक्षण सस्थान मेरिट के आधार पर निर्णय नहीं ले सकेंगे।
यू.जी.सी. रेगुलेशन 2026 के उक्त नियम सामान्य वर्ग के लिये एकतरफा काला कानून है, जिसे सामान्य वर्ग के विरुद्ध हथियार के रुप में प्रयोग किये जाने की पूर्ण संभावना है। हम यू.जी.सी. रेगुलेशन 2026 के भेदभावपूर्ण, एकतरफा काले कानून का पुरजोर विरोध करते है और इस काले कानून को तत्काल वापस लिये जाने की मांग करते है।
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