छत्तीसगढ़

धान खरीदी केंद्रों में उठाव नहीं होने से अव्यवस्था, जगह की भारी कमी, 500 यूनिट की लिमिट बनी किसानों की मुसीबत……

जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । बस्तर जिले में सरकार की महत्वाकांक्षी धान खरीदी योजना किसानों के लिए राहत का माध्यम मानी जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है । एक ओर जहां सरकार किसानों के हित में धान खरीदी को लेकर बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर धान का उठाव समय पर नहीं होने के कारण खरीदी केंद्रों पर गंभीर अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई है ।

वर्तमान में धान खरीदी केंद्रों पर प्रति दिन केवल 500 यूनिट (क्विंटल) तक ही खरीदी की जा रही है । इससे अधिक धान की खरीदी नहीं हो पा रही है । किसानों और जनप्रतिनिधियों द्वारा टोकन बढ़ाने की मांग लगातार की जा रही है, लेकिन अब तक टोकन की संख्या में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जिससे किसान परेशान हैं और खरीदी की गति धीमी बनी हुई है ।

धान खरीदी तो हो रही है, लेकिन राइस मिलों से समय पर उठाव नहीं होने के कारण खरीदी केंद्रों में जगह की भारी कमी हो गई है । कई केंद्रों पर धान खुले में रखा गया है, जिससे बारिश, नमी और अन्य प्राकृतिक जोखिमों का खतरा बना हुआ है । इस स्थिति से खरीदी प्रभारी, लेम्पस प्रबंधक, मजदूर और किसान सभी जूझ रहे हैं ।

विडंबना यह है कि दिसंबर माह से खरीदी प्रारंभ होने के बावजूद अब तक कई क्षेत्रों में धान का नियमित उठाव शुरू नहीं हो पाया है । राइस मिलों और सरकार के बीच हुए अनुबंधों को समय पर पूरा नहीं किए जाने से यह समस्या और गहराती जा रही है । खरीदी प्रभारियों का कहना है कि यदि शीघ्र उठाव नहीं हुआ, तो धान सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाएगा ।

जनपद पंचायत जगदलपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बमनी से लगभग 3000 क्विंटल धान बाबा राइस मिल, मारकेल को दिए जाने की प्रक्रिया से कुछ राहत जरूर मिली है । बमनी, नगरनार सहित अन्य ग्रामों में आंशिक रूप से धान परिदान की प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है ।

इसी तरह जनपद पंचायत बकावंड के अंतर्गत मालगांव लेम्पस के खरीदी क्रमांक-02 क्षेत्र में आने वाले करीतगांव, उलनार, टलनार, बजावंड एवं नलपावंड में धान खरीदी तो की जा रही है, लेकिन नलपावंड, कोसमी और बकावंड क्षेत्र में धान उठाव की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो पाई है । इससे किसान, गोदाम प्रभारी और लेम्पस प्रबंधन सभी गंभीर परेशानी में हैं ।

धान खरीदी केंद्रों पर बनी यह स्थिति अब चर्चा का विषय बन गई है । किसान और खरीदी प्रभारी दोनों ही चाहते हैं कि सरकार केवल खरीदी तक सीमित न रहकर उठाव, भंडारण और टोकन व्यवस्था को भी सुचारू बनाए ।

अब आवश्यकता है कि सरकार इस ओर आवश्यक रूप से ध्यान दे, धान उठाव की प्रक्रिया तत्काल शुरू करे, 500 यूनिट की लिमिट को बढ़ाकर टोकन संख्या में वृद्धि करे, राइस मिलों के साथ हुए अनुबंधों को शीघ्र लागू कराए ताकि खरीदी केंद्रों पर अव्यवस्था दूर हो और सभी किसान समय पर अपना धान बेच सकें ।

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