छत्तीसगढ़

बोधघाट परियोजना के विरोध और बाढ़ प्रभावित किसानों के मुआवजे की मांग को लेकर कांग्रेस की प्रेसवार्ता…

जगदलपुर (प्रभात क्रांति)। बोधघाट परियोजना को निरस्त करने और बाढ़ प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग को लेकर कांग्रेस ने जगदलपुर के आंध्रा भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने भाजपा सरकार पर किसानों और आदिवासी परिवारों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए प्रभावितों को तत्काल राहत देने की मांग की। प्रेसवार्ता में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, विधायक लखेश्वर बघेल, कांग्रेस नेता हरीश कवासी, कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुनील सुशील मौर्य सहित अन्य नेताओं ने अपनी बात रखी।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि तूफान अर्नव और इंद्रावती व भस्केली एवं अन्य नदियों के आसपास के क्षेत्रों में हुई अतिवृष्टि के कारण किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। कई किसानों की धान की फसल बर्बाद होने से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। नेताओं का कहना है कि नुकसान के अनुपात में कम मुआवजा देना किसानों के हित में नहीं है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का उचित सर्वेक्षण कराकर किसानों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग की।

बोधघाट परियोजना से 65 गांव प्रभावित होने की आशंका

प्रेसवार्ता में कांग्रेस ने बोधघाट परियोजना का विरोध करते हुए कहा कि इससे लगभग 65 गांव प्रभावित हो रहे हैं। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, परियोजना के कारण हजारों आदिवासी परिवारों, किसानों और खेतीहर मजदूरों के घर, जमीन और आजीविका पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी माटी, जंगल और खेती से विस्थापित करने के बजाय उनकी भावनाओं और अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने परियोजना को आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित परिवारों के हितों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की।

1969 में भी उठे थे पर्यावरण और विस्थापन के सवाल

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि बोधघाट परियोजना का प्रस्ताव वर्ष 1969 में सामने आया था। उस समय भी पर्यावरणीय प्रभाव, जंगलों के डूब क्षेत्र में आने और आदिवासी आबादी के विस्थापन को लेकर आपत्तियां उठाई गई थीं। नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा की डबल इंजन सरकार के कार्यकाल में परियोजना को फिर से आगे बढ़ाने की चर्चा से प्रभावित गांवों में चिंता बढ़ी है। कांग्रेस का कहना है कि बस्तर के प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय लोगों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

बस्तर के हितों को लेकर आंदोलन की तैयारी

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि बस्तर के विकास के नाम पर यदि स्थानीय लोगों की जमीन, जंगल और आजीविका पर संकट आता है, तो पार्टी इसका विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि बोधघाट परियोजना को लेकर दिल्ली में भी वरिष्ठ नेताओं के समक्ष क्षेत्र की चिंताओं को उठाया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी को बस्तर लाकर परियोजना के विरोध में एक दिवसीय कार्यक्रम आयोजित करने की संभावना भी जताई गई।

अंत में कांग्रेस ने शासन से मांग की कि बाढ़ प्रभावित किसानों को शीघ्र उचित मुआवजा एवं ऋण माफ किया जाए, प्रभावित परिवारों को राहत एवं पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और बोधघाट परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों की आशंकाओं पर गंभीरता से विचार किया जाए।

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