बस्तर के अंतिम छोर पर पोटा केबिनों में भविष्य गढ़ रहे बच्चे, तीन दशक बाद भी पक्के भवन का इंतजार…


बीजापुर (प्रभात क्रांति)। बस्तर संभाग के अंतिम छोर पर बसे नक्सल प्रभावित इलाकों में आज भी सैकड़ों बच्चे विपरीत परिस्थितियों के बीच शिक्षा हासिल कर अपने सुनहरे भविष्य का सपना संजोए हुए हैं। छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से बीजापुर, सुकमा, कोंटा सहित दक्षिण बस्तर के कई इलाकों में पोटा केबिन स्थापित किए गए। इन आवासीय विद्यालयों में आज भी सैकड़ों छात्र रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन तीन दशक बीतने के बाद भी कई पोटा केबिनों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
दूर-दराज के जंगलों के बीच संचालित इन पोटा केबिनों में आज भी कई स्थानों पर बच्चे तिरपाल और अस्थायी ढांचों में रहकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। क्षेत्र घने जंगलों से घिरा होने के कारण सांप-बिच्छू और जहरीले कीट-पतंगों का खतरा हमेशा बना रहता है। इसके बावजूद स्थायी भवनों का निर्माण नहीं हो सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई, जिससे बच्चों को असुरक्षित माहौल में शिक्षा ग्रहण करनी पड़ रही है।
पिछले कई वर्षों में सरकारों ने शिक्षा और बुनियादी ढांचे को लेकर बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन पोटा केबिनों की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उनका कहना है कि अस्थायी भवनों में रहने के कारण बच्चों को मलेरिया, डेंगू, फाइलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बना रहता है, वहीं सर्पदंश जैसी घटनाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में सबसे पहले इन आवासीय विद्यालयों के लिए सुरक्षित और स्थायी भवनों का निर्माण किया जाना चाहिए।
आवापल्ली विकासखंड के ग्राम दुगईगुड़ा स्थित पोटा केबिन में करीब 250 छात्र अध्ययनरत हैं। ये बच्चे दूरस्थ और अंदरूनी गांवों से यहां शिक्षा प्राप्त करने आते हैं। हालांकि यहां स्वास्थ्य सुविधाएं, सामुदायिक भवन और अन्य बुनियादी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च करने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर पोटा केबिनों में पढ़ने वाले बच्चों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
इस संबंध में दुगईगुड़ा पोटा केबिन के अधीक्षक विनोद मड़े ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यालय प्रबंधन बच्चों की शिक्षा, देखभाल और स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई कमी नहीं आने देने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार द्वारा स्थायी भवन और बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो इन दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सकेगा।





