15वें वित्त आयोग की राशि पर अघोषित रोक: ग्राम पंचायतों का विकास पूरी तरह ठप, ‘साय सरकार’ की पंचायती राज व्यवस्था के प्रति उदासीनता उजागर.. रोहित पानीग्राही

जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । प्रदेश की विष्णुदेव साय सरकार के कार्यकाल में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकास की रीढ़ मानी जाने वाली ‘त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था’ चरमराने की स्थिति में आ गई है। 15वें वित्त आयोग (15th Finance Commission) के अंतर्गत केंद्र से प्राप्त होने वाली राशि का ग्राम पंचायतों को समय पर आवंटन न होने से प्रदेश के हजारों गांवों में विकास कार्य अधर में लटक गए हैं।
इस संबंध में जारी एक बयान में युवा कांग्रेस नेता पूर्व जनपद सदस्य प्रतिनिधि रोहित पानीग्राही ने कहा ने कहा कि वित्तीय प्रवाह का रुकना न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि यह ग्रामीण जनता के संवैधानिक अधिकारों का हनन भी है।
15वें वित्त आयोग की राशि ग्राम पंचायतों का संवैधानिक अधिकार है। यह राशि सीधे तौर पर गांवों की मूलभूत आवश्यकताओं—पेयजल, स्वच्छता, और अधोसंरचना संधारण—के लिए होती है। राज्य सरकार द्वारा इस राशि के प्रवाह (Fund Flow) में अवरोध उत्पन्न करना ‘ग्राम स्वराज’ की अवधारणा पर सीधा प्रहार है।
राशि आवंटित न होने के कारण वर्तमान में ग्राम पंचायतों के पास दैनिक कार्यों के संचालन, जल आपूर्तिकर्ताओं के भुगतान, और साफ-सफाई कर्मियों के मानदेय देने तक के लिए कोष उपलब्ध नहीं है। सरपंच और पंचायत प्रतिनिधि प्रशासनिक लाचारी महसूस कर रहे हैं।
केंद्र और राज्य में एक ही पार्टी, एक ही विचारधारा की सरकार होने के बावजूद, केंद्रीय अनुदान का पंचायतों तक न पहुंचना ‘डबल इंजन’ सरकार के दावों की पोल खोलता है। यह स्पष्ट करता है कि राज्य स्तर पर वित्तीय कुप्रबंधन (Financial Mismanagement) हावी है।
गर्मी का मौसम निकट है और ऐसे समय में पेयजल योजनाओं के संधारण के लिए राशि का न होना एक बड़े जल संकट को निमंत्रण दे रहा है। साय सरकार का यह रवैया जनहितैषी न होकर ग्रामीण विरोधी प्रतीत हो रहा है।
हम राज्य शासन और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से मांग करते हैं कि: तत्काल आवंटन: 15वें वित्त आयोग की रुकी हुई किस्तों को बिना किसी विलंब के सीधे ग्राम पंचायतों के खातों में हस्तांतरित किया जाए।
श्वेत पत्र जारी हो: सरकार स्पष्ट करे कि केंद्र से प्राप्त राशि अब तक पंचायतों को क्यों जारी नहीं की गई और यह राशि कहां डंप पड़ी है?
प्रशासनिक जवाबदेही: इस विलंब के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
यदि 7 दिवस के भीतर राशि का आवंटन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो हम ग्राम स्तर पर सरपंच संघ और ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।





