कोंडागांव लैम्प्स की अमरावती शाखा में ऋण घोटाला उजागर, कर्जमाफी के बाद भी 12 आदिवासी किसान बने ऋणी… देखें वीडियो –


कोंडागांव (प्रभात क्रांति) । जिला मुख्यालय कोंडागांव अंतर्गत जिला सहकारी बैंक की लैम्प्स शाखा अमरावती में इन दिनों 12 आदिवासी किसानों के नाम पर हुए फर्जी ऋण का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
ज्ञात हो कि कोंडागांव जिला के जनपद पंचायत माकड़ी के ग्राम पंचायत वनबेलगांव निवासी गोंड आदिवासी किसानों का कांग्रेस सरकार में वर्ष 2021 में शासन की योजना के तहत ऋण माफ कर दिया गया था। आरोप है कि ऋण माफी के पश्चात लैम्प्स कर्मी—रवि कुमार, आयतु एवं गुरबारू द्वारा किसानों से उनके ऋण पुस्तिका (पट्टा), आधार कार्ड व बैंक पासबुक आदि दस्तावेज लिए गए। किसानों को विश्वास में लेकर यह बताया गया कि उद्यानिकी विभाग से मिर्ची की खेती के लिए सरकारी सब्सिडी का पैसा दिलाया जाएगा।

इसके बाद किसानों को कोंडागांव लाकर जिला सहकारी बैंक से करीब 22 लाख रुपये का केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) ऋण आहरित कराया गया। आरोप है कि बैंक से राशि निकलते ही रास्ते में ही लैम्प्स कर्मियों ने पूरे पैसे अपने कब्जे में ले लिए और किसानों को ऋण मुक्त होने का झांसा देकर घर भेज दिया। किसान भी इस बात से बेखबर होकर निश्चिंत हो गए।
नोटिस मिलने पर खुला फर्जीवाड़े का राज
मामले का खुलासा तब हुआ जब वर्ष 2024-25 में किसानों को ऋण अदायगी के नोटिस थमाए गए। नोटिस देखकर हतप्रभ अनपढ़ किसान जब लैम्प्स शाखा पहुंचे, तो तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने उन पर ऋण बकाया होने की बात कहकर उन्हें वापस लौटा दिया।
प्रभावित किसानों के नाम
फूलमन पिता सन्नू, लालो (पिता बुधराम), हुंगा (पिता कानू), मासो (पिता मुडरू), बुटलो (पिता जेमटू), आसनों (पिता बोंजा), मैतर (पिता बोटे), बोडा पिता हड़मो), तुलसी पिता हुंगो, गंगा पिता मड्डा सहित कुल 12 किसान शामिल हैं।
पट्टे और ऋण के लिए दर-दर भटकने को मजबूर
पीड़ित किसानों का कहना है कि कर्मियों ने उनके नाम पर लाखों का गबन कर लिया। अब स्थिति यह है कि किसान न तो अपनी जमीन के पट्टे वापस पा रहे हैं और न ही डिफाल्टर होने के कारण किसी अन्य योजना या बैंक से नया ऋण ले पा रहे हैं।
परेशान और आक्रोशित किसानों ने एकजुट होकर अब प्रशासनिक अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों को लिखित शिकायत व आवेदन सौंपकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई तथा ऋण मुक्ति की मांग करने का निर्णय लिया है। समाचार लिखे जाने तक किसान आवेदन तैयार कर प्रक्रिया में जुटे हुए थे।
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