करपावंड भूमि विवाद की जांच को लेकर संयुक्त कलेक्टर की टीम ने किया स्थल निरीक्षण, साक्षी बने आदिवासी नेता नील कुमार बघेल….


जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । बकावंड विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत करपावंड में भूमि अभिलेखों में कथित गड़बड़ी और किसानों की शिकायतों के बीच अब 21 आदिवासी परिवारों पर विस्थापन का खतरा भी मंडराने लगा है । बस्तर कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच दल ने संयुक्त कलेक्टर ए.आर. राणा की टीम गांव पहुंचकर संबंधित भूमि का स्थलीय निरीक्षण किया । निरीक्षण के दौरान प्रभावित किसानों, ग्रामीणों और अधिकारियों से चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली गई । संयुक्त कलेक्टर ने कहा कि वर्तमान में वर्षा और फसल का समय है, इसलिए किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रक्रिया अपनाई जाएगी तथा जांच पूरी तरह निष्पक्ष और तथ्यों के आधार पर की जाएगी ।
इस दौरान संयुक्त कलेक्टर ने बताया कि लगभग 20 एकड़ भूमि का विस्तृत अवलोकन किया जाना है । जांच दल शांतिपूर्ण माहौल में सभी पक्षों की बात सुन रहा है और जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेगा, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। उल्लेखनीय है कि किसानों ने भूमि अभिलेखों में कथित त्रुटियों और रिकॉर्ड में गड़बड़ियों की शिकायत करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की थी, जिसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच दल गठित किया ।
पीड़ित महिलाओं ने बताया कि वे अपने बाप-दादा के समय से इस भूमि पर रह रही हैं और अब घर खाली करने की आशंका से डरी हुई हैं । सभी 21 परिवार एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष सुनवाई की मांग कर रहे हैं । इस मामले में आदिवासी नेता नील कुमार बघेल किसान मोर्चा अध्यक्ष तथा महिला समूह, आदिवासी अध्यक्ष लखेश्वर कश्यप की मौजूदगी में ग्रामीणों की बात सुनी गई ।
उन्होंने निर्दोष ग्रामीणों पर दर्ज एफआईआर की निष्पक्ष समीक्षा और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने की भी मांग की । ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि निष्पक्ष जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी । संयुक्त कलेक्टर ए.आर. राणा की टीम के साथ तहसीलदार, थाना प्रभारी एवं संबंधित अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहें ।
गौरतलब है कि करपावंड के किसानों ने भूमि अभिलेखों में कथित त्रुटियों और रिकॉर्ड में गड़बड़ियों को लेकर प्रशासन से कई वर्षो से निष्पक्ष जांच की मांग की थी । मामले के सार्वजनिक होने के बाद जिला प्रशासन द्वारा जांच दल गठित कर मौके पर भेजना इस मामले को गंभीरता से लिए जाने का संकेत माना जा रहा है ।
ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि निष्पक्ष जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी ।





