छत्तीसगढ़

बकावंड तालाब के निर्माण कार्य में मौत का पूरा इंतजाम, आधे-अधूरे बेतरतीब काम ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुसीबत, डेढ़ करोड़ के निर्माण कार्य में लग रहे अनियमितता के आरोप….

जगदलपुर(प्रभात क्रांति)। बकावंड सूक्ष्म सिंचाई तालाब का नवीनीकरण कार्य तीन साल बीतने के बावजूद पूरा नहीं हो पाया है। आधे-अधूरे बेतरतीब काम की वजह से तालाब जहां एक ओर ग्रामीणों तथा मवेशियों के आकस्मिक मौत को सीधे आमंत्रित कर रहा है वहीं बंड का इस बरसात में बहने का खतरा भी मंडरा रहा है। लापरवाही की हद तो यह है कि निर्माण कार्य शुरू होने के तीन साल बाद जल संसाधन विभाग ने 15 जून को डिमार्केशन का आवेदन तहसीलदार को दिया है ताकि आगामी ग्रीष्म ऋतु जब प्रारंभ हो तो पहले के अनियमित कामों को बारिश की भेंट चढ़ाकर नुकसान बताया जा सके। इस पूरे हेराफेरी में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत साफ नजर आ रही है, जिसका स्थानीय ग्रामीण लगातार विरोध दर्ज करा रहे हैं पर उचित कार्यवाही न होने से आक्रोशित हैं।

गौरतलब है कि बकावंड सूक्ष्म सिंचाई तालाब का निर्माण कार्य मार्च 1965 को पूरा हुआ था, तब से जलाशय और नहरों का मरम्मत कार्य नहीं हो पाया था जिसके कारण इस जलाशय की सिंचित क्षमता 73 से आधे से भी कम 31 हेक्टेयर रह गई थी इसलिए नये स्ट्रक्चर का निर्माण बहुत जरूरी था। बकावंड के ग्रामीणों की इस सम्बंध में लंबे समय से की जा रही मांग के बाद क्षेत्रीय विधायक लखेश्वर बघेल के विशेष प्रयास से तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस निर्माण कार्य को स्वीकृत किया, एक करोड़ 51 लाख 09 हजार की लागत के निर्माण कार्य का शिलान्यास स्वयं विधायक ने 28 सितम्बर 2023 को किया, अक्टूबर 2023 से काम शुरू हुआ पर अभी भी पूरा नहीं हो सका है जो विभागीय लापरवाही एवं भ्र्ष्टाचार की भेंट चढ़ गया है।

इस नवीनीकरण कार्य मे हेड वर्क के लिए 114.91 लाख रुपये तथा केनाल वर्क के लिए 36.18 लाख रुपये की लागत तय की गई थी। खर्च कितना हुआ यह पता नहीं पर निर्माण के नाम पर लीपापोती ही कार्य स्थल पर नजर आ रहा है। जलाशय के बंड के करीब ही 6 फीट गहरी नाली खोद दी गई है जिससे ग्रामीण तालाब में उतरने से डरने लगे हैं और इस सम्बंध में कोई सूचना फलक न होने से दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है। गड्ढे से निकले मलबे को जलाशय में ही छोड़ दिया गया है। इस गड्ढे में पिचिंग की जानी थी जिससे जलाशय का बंड मजबूत हो पर अब जलभराव और रिसाव के कारण पूरे बंड के ढहने का खतरा उत्पन्न हो गया है, बरसात के मौसम में यदि बंड ढहता है तो खरीफ की फसलें पूरी तरह से डूब जाएगी। साथ ही नहर के निर्माण के लिए भी बंड को कमजोर कर यूं ही छोड़ दिया गया है। साथ ही बंड के ऊपर मुरुमीकरण न किये जाने से आवागमन भी ठप हो गया है। नवीनीकरण कार्य के तहत जलाशय से गाद निकालने का काम और गहरीकरण भी नहीं हो पाया है। सीमेंट कंक्रीट के जो काम हुए हैं वह भी इस्टीमेट से इतर हैं। लोगों के आंखों में धूल झोंकने के लिए शिलान्यास पत्थर भी गायब है। बकावंड के पूर्व सरपंच बलियार मौर्य, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जानकी राम सेठिया ने अब तक हुए निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच औऱ लापरवाह अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग प्रशासन से की है।

 

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