बस्तर में शांति केवल सुरक्षा से नहीं, विश्वास और संवैधानिक अधिकारों से आएगी — महेश स्वर्ण


जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । देश के गृह मंत्री माननीय अमित शाह जी का बस्तर आगमन ऐसे समय में हो रहा है, जब पूरे देश की नजर बस्तर पर है। वर्षों से बस्तर संघर्ष, सुरक्षा, विकास, पहचान और अधिकारों के सवालों से जूझता रहा है।
लेबर पार्टी ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष एवं लोकसभा क्षेत्र क्रमांक 09 महासमुंद के प्रत्याशी महेश स्वर्ण “एबोरिजिनल ट्राइब्स!” ने कहा कि बस्तर केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह जल, जंगल, जमीन, संस्कृति, परंपरा और मूलनिवासी अस्मिता का जीवंत प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के दौर में “जल, जंगल, जमीन” का नारा बहुत सुनाई दिया, लेकिन अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या बस्तर की वास्तविक समस्याओं का समाधान होगा या केवल नारों और आवाजों को समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा।
महेश स्वर्ण ने कहा कि बस्तर में स्थायी शांति केवल सुरक्षा व्यवस्था से नहीं आएगी। वास्तविक शांति तभी संभव है जब बस्तर के लोगों को—
संवैधानिक अधिकार,शिक्षा,स्वास्थ्य,रोजगार,ग्राम स्वशासन,
और स्थानीय संस्कृति का सम्मान
व्यवहारिक रूप से प्राप्त हो।
उन्होंने कहा कि बस्तर के विकास का अर्थ केवल सड़क, खनन, परियोजनाएं और सुरक्षा कैंप नहीं होना चाहिए। विकास का वास्तविक अर्थ है—
स्थानीय लोगों की भागीदारी, उनके अधिकारों की सुरक्षा, प्रकृति के साथ संतुलन और जनसम्मान।
महेश स्वर्ण ने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की कि बस्तर के लिए ऐसी नीति बनाई जाए जिसमें पाँचवीं अनुसूची, पेसा कानून, ग्रामसभा की भूमिका, वनाधिकार और स्थानीय रोजगार को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने बस्तर की जनता से अपील की कि वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक मार्ग पर चलते हुए अपने अधिकार, पहचान और भविष्य के प्रति जागरूक रहें।
महेश स्वर्ण ने कहा—
“जल, जंगल, जमीन और जनसम्मान ही बस्तर की आत्मा है।
इसका संरक्षण केवल बस्तर के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रहित के लिए भी आवश्यक है।”





