108 एम्बुलेंस सेवा खुद बीमार, 7 साल में जर्जर हुई व्यवस्था, मरीजों की जान बचाने वाली सेवा आज खुद इलाज को तरस रही, स्वास्थ्य विभाग बेपरवाह….देखें वीडियों

जगदलपुर (प्रभात क्रांति) । बस्तर जिले में मरीजों के लिए जीवनदायिनी मानी जाने वाली 108 इमरजेंसी मोबाइल मेडिकल सेवा आज खुद बदहाल स्थिति में पहुंच गई है । जो सेवा वर्षों से मरीजों की जान बचाने का काम कर रही थी, वही अब खुद बीमार होकर इलाज की मोहताज हो गई है । हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर स्थिति के बावजूद स्वास्थ्य विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है ।

जिला मुख्यालय स्थित महारानी अस्पताल के पीछे संचालित 108 एम्बुलेंस सेवा पिछले लगभग 7 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रही है । शुरुआत में यहां 14 एम्बुलेंस तैनात थीं, जो आपातकालीन स्थिति में संजीवनी का काम करती थीं और सैकड़ों मरीजों की जान बचा चुकी हैं । लेकिन अब यही गाड़ियां एक-एक कर जवाब देने लगी हैं और खुद खस्ताहाल हो चुकी हैं ।
स्थिति केवल वाहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां कार्यरत कर्मचारियों, नर्सों और मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाएं भी बेहद खराब स्थिति में हैं । परिसर में गंदगी का अंबार लगा हुआ है और रहने की व्यवस्था इतनी भयावह है कि यहां काम करने वाले मेडिकल स्टाफ खुद दयनीय स्थिति में जीवन यापन करने को मजबूर हैं ।
विडंबना यह है कि जो विभाग लोगों को स्वच्छता और स्वास्थ्य का संदेश देता है, वही खुद गंदगी और अव्यवस्था का शिकार बना हुआ है । कॉल सेंटर की हालत भी बदतर है, जहां मकड़ियों के जालों के बीच कर्मचारी काम करने को मजबूर हैं ।
मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि 7 वर्षों से लगातार सेवा देने के बावजूद अब तक स्टाफ के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है । उनका कहना है कि ”दूसरों का इलाज करने वाला यह तंत्र आज खुद बीमार अवस्था में पहुंच गया है ।“
108 मेडिकल टीम से बातचीत में यह भी सामने आया कि पर्याप्त बजट और संसाधनों की कमी के कारण यह सेवा धीरे-धीरे दम तोड़ रही है। व्यवस्था जस की तस बनी हुई है और सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा ही इस हाल में है, तो आम मरीजों की स्थिति क्या होगी। अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर लापरवाही पर कब संज्ञान लेता है और इस जीवनरक्षक सेवा को फिर से पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाता है।
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