बस्तर आईटीआई छात्रावास में फंड संकट, भोजन राशि नहीं मिलने से छात्र परेशान, स्थाई फंड का इंतजार, छात्र-छात्राओं ने उठाए व्यवस्था पर सवाल… देखें वीडियो


जगदलपुर (प्रभात क्रांति)। बस्तर जिले के ग्राम परचनपाल स्थित बस्तर संभाग के सबसे बड़े और पुराने औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में अध्ययनरत छात्र-छात्राएं इन दिनों गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों को भोजन व्यवस्था के लिए मिलने वाला स्थाई फंड लंबे समय से नहीं मिलने के कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, आईटीआई परचनपाल में लगभग 150 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिनमें करीब 100 छात्र एवं 50 छात्राएं शामिल हैं। इनमें अधिकांश विद्यार्थी दूर-दराज और आदिवासी क्षेत्रों से आकर यहां शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। शासन की ओर से छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों के भोजन एवं आवश्यक खर्च के लिए स्थाई फंड की व्यवस्था की गई है, लेकिन आरोप है कि पिछले कुछ माह से यह राशि विद्यार्थियों तक नहीं पहुंची है। 
छात्र-छात्राओं ने बताया कि कई महीनों से फंड नहीं मिलने के कारण उन्हें भोजन और दैनिक जरूरतों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दूरस्थ जिलों से आए गरीब एवं आदिवासी छात्र आर्थिक तंगी में पढ़ाई जारी रखने को मजबूर हैं।
इस संबंध में जब छात्रावास प्रबंधन और प्राचार्य से चर्चा की गई, तो उन्होंने राज्य सरकार से फंड जारी नहीं होने की बात कही। वहीं आदिवासी विभाग के सहायक आयुक्त ने विभाग की ओर से किसी प्रकार की गड़बड़ी से इनकार करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को मानदेय दिए जाने की प्रक्रिया जारी है।
हालांकि, मामले को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। प्राचार्य द्वारा फंडिंग नहीं होने की बात कहे जाने के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर छात्रों के नाम पर स्वीकृत राशि कहां अटक रही है।
छात्रावास में रहने वाले आदिवासी छात्र-छात्राओं का कहना है कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। उनका आरोप है कि शासन की योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिलने से उनकी पढ़ाई और जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
इस पूरे मामले ने संस्थान की व्यवस्था और फंड संचालन प्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यार्थियों एवं स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द से जल्द फंड जारी किया जाए, ताकि छात्र-छात्राओं को राहत मिल सके और भविष्य में इस तरह की समस्याओं से बचा जा सके।
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