चैत्र नवरात्रि के अवसर पर बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के दर्शन के लिए दंतेवाड़ा मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही – देखें विडियों

दंतेवाड़ा(प्रभात क्रांति), माँ दंतेश्वरी यह मंदिर छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में स्थित है और माँ दंतेश्वरी यहाँ की प्रमुख देवी के रूप में पूजी जाती हैं। नवरात्रि के दौरान दूर-दराज से भक्त पैदल यात्रा करके मंदिर पहुँचते हैं और अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। इस पवित्र समय में मंदिर में लगभग 3000 ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं, जो भक्ति और आस्था का प्रतीक हैं।
हजारों की संख्या में श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं, जिससे मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूब जाता है।मंदिर की सुंदरता को और निखारने के लिए जिला प्रशासन ने खूबसूरत प्रवेश द्वार और रेड कॉरिडोर का निर्माण करवाया है। इसके अलावा, काशी की तर्ज पर शंखनाद नदी के तट पर घाट आरती का आयोजन भी किया जाता है, जो भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
यह सभी प्रयास मंदिर की भव्यता और आकर्षण को और बढ़ाते हैं, जिससे यह स्थान न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और पर्यटन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हो जाता है।क्या आप माँ दंतेश्वरी मंदिर या चैत्र नवरात्रि के इस उत्सव के बारे में और कुछ विशेष जानकारी चाहेंगे? जैसे कि मंदिर का इतिहास, पूजा विधि, या बस्तर की सांस्कृतिक परंपराएँ
माँ दंतेश्वरी मंदिर का इतिहास
माँ दंतेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में स्थित है और यह बस्तर की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। यह मंदिर लगभग 600 वर्ष पुराना माना जाता है और इसे काकतिया वंश के शासकों ने स्थापित किया था। मान्यता है कि माँ दंतेश्वरी, माँ दुर्गा का ही एक रूप हैं, जिनका नाम “दंत” (दाँत) से प्रेरित है।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब माँ सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह किया था, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर को खंडित किया था। माँ का एक दाँत बस्तर के इस क्षेत्र में गिरा, जिसके कारण यहाँ माँ दंतेश्वरी की स्थापना हुई। यह मंदिर शक्ति पीठों में से एक माना जाता है।मंदिर का स्थान शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम पर है, जो इसे और भी पवित्र बनाता है।
बस्तर के राजपरिवार और स्थानीय आदिवासी समुदाय के लिए माँ दंतेश्वरी विशेष महत्व रखती हैं। बस्तर दशहरा, जो विश्व प्रसिद्ध है, भी माँ दंतेश्वरी को समर्पित होता है और इस दौरान मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं।चैत्र नवरात्रि में पूजा विधिचैत्र नवरात्रि के दौरान माँ दंतेश्वरी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान किए जाते हैं। यहाँ की पूजा में स्थानीय आदिवासी परंपराएँ और वैदिक रीति-रिवाजों का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।
कुछ प्रमुख बिंदु:ज्योति कलश प्रज्वलन:
जैसा कि आपने बताया, लगभग 3000 ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं। ये कलश माँ की शक्ति और भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक होते हैं। भक्त अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए इन्हें जलाते हैं।नित्य आरती और पाठ: नवरात्रि के नौ दिनों तक माँ के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। सुबह और शाम को विशेष आरती होती है, जिसमें भक्त बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
हवन और कन्या पूजन:
नवरात्रि के अंतिम दिनों में हवन का आयोजन होता है, जिसमें माँ को आहुतियाँ दी जाती हैं। अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन भी किया जाता है, जिसमें छोटी बालिकाओं को माँ का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है।स्थानीय परंपराएँ: बस्तर के आदिवासी समुदाय माँ को प्रसन्न करने के लिए पारंपरिक नृत्य और गीत प्रस्तुत करते हैं। कुछ समुदाय माँ को विशेष भेंट भी चढ़ाते हैं, जैसे नारियल, फल, और स्थानीय उत्पाद।बस्तर की सांस्कृतिक परंपराएँबस्तर की संस्कृति अपनी अनूठी और जीवंत परंपराओं के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। माँ दंतेश्वरी मंदिर इस सांस्कृतिक धरोहर का केंद्र है।
कुछ प्रमुख सांस्कृतिक पहलू:बस्तर दशहरा:
यह विश्व का सबसे लंबा दशहरा उत्सव है, जो 75 दिनों तक चलता है। इस दौरान माँ दंतेश्वरी की विशेष पूजा होती है, और रथ यात्रा निकाली जाती है। यह उत्सव आदिवासी और गैर-आदिवासी समुदायों को एक साथ लाता है।
आदिवासी परंपराएँ:
बस्तर के आदिवासी समुदाय, जैसे गोंड, मारिया, और मुरिया, माँ दंतेश्वरी को अपनी रक्षक मानते हैं। उनके पारंपरिक नृत्य, जैसे मंडर और गौर नृत्य, मंदिर के आयोजनों में देखे जा सकते हैं।
घाट आरती:
आपने काशी की तर्ज पर होने वाली घाट आरती का जिक्र किया। यह हाल के वर्षों में शुरू हुई एक परंपरा है, जिसमें शंखनाद नदी के तट पर दीप जलाकर और भक्ति भजनों के साथ माँ की आरती की जाती है। यह नजारा बहुत ही मनोरम होता है और भक्तों को काशी के घाटों की याद दिलाता है।
हस्तशिल्प और कला:
बस्तर की बेल मेटल और टेराकोटा कला भी मंदिर परिसर में देखी जा सकती है। नवरात्रि के दौरान यहाँ मेला भी लगता है, जिसमें स्थानीय हस्तशिल्प और व्यंजनों का आनंद लिया जा सकता है।मंदिर की खूबसूरती और प्रशासनिक प्रयासजिला प्रशासन ने मंदिर को और आकर्षक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। खूबसूरत प्रवेश द्वार और रेड कॉरिडोर न केवल मंदिर की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि भक्तों के लिए सुगम दर्शन की व्यवस्था भी करते हैं। रात में मंदिर की सजावट और रोशनी इसे और भी भव्य बनाती है। घाट आरती के लिए बनाया गया तट भी पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक नया है।
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