छत्तीसगढ़

बाढ़ प्रभावित किसानों के समर्थन में एकजुट हुए भाजपा-कांग्रेस सहित किसान संगठन, मुआवजे को लेकर सरकार के सामने रखी मांगें…. देखें वीडियो – 

जगदलपुर (प्रभात क्रांति)। बस्तर जिले में इंद्रावती, भस्केली और अन्य नदियों के डूबान क्षेत्रों में बाढ़ से प्रभावित किसानों के मुआवजे का मुद्दा अब जोर पकड़ने लगा है। फसल बर्बादी की भरपाई और उचित मुआवजे की मांग को लेकर जिले के किसान एकजुट होकर जिला मुख्यालय पहुंचे। खास बात यह रही कि किसानों के समर्थन में भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता तथा किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी एक मंच पर नजर आए। सभी ने किसानों की मांगों को जायज बताते हुए शासन-प्रशासन से शीघ्र उचित राहत देने की मांग की।

किसानों के समर्थन में भाजपा किसान नेता नील कुमार बघेल, कांग्रेस किसान नेता दयाराम कश्यप, टिकैत किसान संगठन से जुड़े प्रतिनिधि तथा विभिन्न किसान समितियों के पदाधिकारी शामिल हुए। इस दौरान मुआवजे की राशि और उसके निर्धारण को लेकर सरकार के समक्ष अपनी बात रखी गई। किसानों और जनप्रतिनिधियों के बीच इस मुद्दे पर तीखी चर्चा भी हुई। सभी ने एक स्वर में कहा कि प्राकृतिक आपदा से बर्बाद हुई फसल का मुआवजा किसानों को वास्तविक नुकसान के आधार पर मिलना चाहिए साथ ही किसान की माँग है कि हर वर्ष किसान क्रेडिट कार्ड बनाते समय फसल का भी बीमा कराया जाता है उसका भी प्राकृतिक आपदा के कारण हुई हानि की राशि की भी गणना कर बीमा कंपनियों को बीमा की राशि तत्काल किसानों को उपलब्ध कराना चाहिए।

8 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के मुआवजे पर किसानों की असहमति

किसानों का कहना है कि बाढ़ में उनकी धान की फसल पूरी तरह प्रभावित हुई है। इसके बावजूद प्रति हेक्टेयर 8 हजार रुपये के निर्धारित मुआवजे को वे पर्याप्त नहीं मान रहे हैं। किसानों ने इस मुआवजा राशि का विरोध करते हुए मांग रखी कि धान की खेती में आने वाली वास्तविक लागत और नुकसान को ध्यान में रखा जाए। उनका कहना है कि एक एकड़ में धान की फसल तैयार करने में लगभग 65 हजार रुपये तक सरकार द्वारा दी जाती है, इसलिए मुआवजा भी इसी के अनुरूप दिया जाना चाहिए। किसानों ने यह भी मुद्दा उठाया कि जिन किसानों पर कृषि ऋण बकाया है, उनकी फसल भी बाढ़ में बर्बाद हुई है, इसलिए उन्हें भी उचित राहत मिलनी चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों और किसान संगठनों ने अपनी-अपनी मांगों को लेकर जिला कलेक्टर सीपी बघेल को ज्ञापन सौंपा और किसानों की नाराजगी से अवगत कराया। किसान संगठनों ने स्पष्ट किया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को वास्तविक नुकसान के अनुसार मुआवजा, ऋणी किसानों को राहत और प्रभावित क्षेत्रों का निष्पक्ष सर्वेक्षण कराया जाना चाहिए। अब किसानों की निगाहें शासन के निर्णय पर टिकी हैं कि उनकी मांगों पर कब तक ठोस कार्रवाई होती है और उन्हें नुकसान के अनुरूप राहत मिल पाती है।

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